आयुर्वेद के अनुसार गलत खान पान और दिनचर्या के कारण वात, पित्त और कफ तीनों का संतुलन बिगड़ जाता है जोकि विभिन्न रोगों के रूप में हमारे सामने आता है। यदि वात का संतुलन अधिक बिगडा हो तो सिरदर्द या न्यूरोलॉजी की समस्या हो जाती है। जिसमें प्रमुख है माइग्रेन का दर्द। माइग्रेन का दर्द जिसके होता है वो ही जानता है कि उस वक्त सहनशक्ति जवाब दे जाती है। तमाम उपचार के बावजूद इस दर्द में आराम नहीं मिल पाता। अंग्रेजी दवा से लेकर देसी दवा तक दर्द में राहत जब नहीं दे पातीं तो लोग कुछ टोटकों की ओर जाते हैं। लाल किताब में माइग्रेन के दर्द से राहत देने का अचूक टोटका बताया गया है। दवाओं के प्रयोग के साथ इस टोटके को भी अपनाकर जरूर देखें।
माइग्रेन के लिए टोटका
दो तरह के होते हैं माइग्रेन
माइग्रेन की समस्या उन लोगों को अधिक होती है जो काम के प्रेशर में होते हैं, नींद पूरी नहीं हो पाती या हर वक्त घर के अंदर खुली हवा से दूर रहते हैं। माइग्रेन का दर्द दो तरह का होता है। क्लासिक माइग्रेन और नॉन क्लासिक माइग्रेन। दोनों के ही लक्षण होते हैं अलग− अलग। क्लासिक माइग्रेन का जब दौरा पड़ने वाला होता है तो सिर दर्द की शुरूआत में आंखों से धुंधला दिखने लगता है। कंधे में जकड़न भी होती है। इस अवस्था में शरीर की रक्तवाहिनी सिकुड़ने लगती ह। वहीं नॉन क्लासिक माइग्रेन में किसी तरह के लक्षण पहले से नजर नहीं आते। सीधे बहुत देती से दर्द होता है।
लाल किताब का माइग्रेन में टोटका
माइग्रेन या आधा सीसी का दर्द का उपाय बहुत ही आसान है। सुबह सूरज उगने के समय एक गुड़ का डला लेकर किसी चौराहे पर जाकर दक्षिण की ओर मुंह करके खड़े हो जाएं। गुड़ को अपने दांतों से दो हिस्सों में काट दें। गुड़ के दोनों हिस्सों को वहीं चौराहे पर फेंक दें और वापस आ जाएं। यह उपाय किसी भी मंगलवार से शुरू कर सकते हैं। पांच मंगलवार लगातार करने से आराम मिलेगा। लेकिन ध्यान रखें कि यह उपाय करते समय आप किसी से भी बात न करें और न ही कोइ आपको पुकारे। न ही आप से किसी तरह कि बात करे।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
