ग्रहण के सूतक काल में पानी और भोजन में डाली गई तुलसी का क्या करें? इसे खाना शुभ या अशुभ?

Grahan Ke Baad Tulsi Ke Patto Ka Kya Karen: आज 3 मार्च को चंद्रग्रहण लग रहा है। चंद्रग्रहण लगने से 9 घंटे पहले ही सूतक काल प्रारंभ हो जाता है। सूतक काल के बाद से ही खाने-पीने की मनाही होती है। ऐसे में खाने-पीने की चीजों में तुलसी की पत्तियां डालकर रखा जाता है। अब सवाल ये उठता है कि ग्रहण के बाद खाने-पीने की चीजों में पड़ीं इन तुलसी की पत्तियों का क्या करना चाहिए। आइए जानते हैं कि इन तुलसी की पत्तियों का ग्रहण के बाद क्या करें?

Grahan Ke Baad Tulsi Ke Patto Ka Kya Karen: आज 2 मार्च 2026 को चंद्रग्रहण लग रहा है। ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं में ग्रहण को विशेष घटना माना जाता है। चंद्रग्रहण तब लगता है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है। वहीं, ज्योतिष के अनुसार जब राहु चंद्रमा को खा लेता है तब ग्रहण लगता है। ग्रहण के कुछ समय पहले से ही सूतक काल भी आरंभ हो जाता है। ऐसे में सूतक काल से लेकर ग्रहण तक खाने-पीने की मनाही होती है। ऐसे में लोग सूतक काल के दौरान ही खाने पीने की चीजों में तुलसी डालकर रख देते हैं। तुलसी को हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है। ऐसे में ग्रहण के दौरान भी खाना दूषित नहीं होता है। ऐसे में सवाल उठता है कि ग्रहण खत्म होने के बाद उस तुलसी का क्या करना चाहिए?

ग्रहण के बाद तुलसी का क्या करें

ग्रहण के बाद तुलसी का क्या करें

ग्रहण खत्म होने के बाद तुलसी का क्या करें?

मान्यता यह है कि ग्रहण समाप्त होने के बाद तुलसी के पत्तों को भोजन से अलग निकालकर फेंकने की जरूरत नहीं होती। वे भोजन के साथ ही रह सकते हैं। ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान कर, पूजा-पाठ करके उस भोजन का सेवन किया जा सकता है। तुलसी के पत्ते भी उसी भोजन के साथ खाए जा सकते हैं, क्योंकि उन्हें ‘रक्षा कवच’ की तरह माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि तुलसी ने ग्रहण के दौरान भोजन को नकारात्मक प्रभाव से बचाया है, इसलिए उसका सेवन शुभ और स्वास्थ्य के लिए लाभकारी समझा जाता है।

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