Skanda Sashti Vrat Katha: स्कंद षष्ठी 2026 के दिन जरूर पढ़ें ये कथा, ये है तारकासुर वध की पौराणिक कहानी

Skanda Sashti Vrat Katha (स्कंद षष्ठी व्रत कथा): स्कंद षष्ठी का दिन भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र भगवान कार्तिकेय को समर्पित है। भगवान कार्तिकेय को स्कंद, कुमारस्वामी और मुरुगन के नाम से जाना जाता है। आज स्कंद षष्ठी व्रत है, व्रत पूजा के साथ स्कंद षष्ठी के दिन कथा का पाठ करना अनिवार्य माना जाता है। यहां पढ़ें स्कंद षष्ठी व्रत कथा, तारकासुर वध की कहानी।

Skanda Sashti Vrat Katha (स्कंद षष्ठी व्रत कथा): स्कंद षष्ठी व्रत भगवान कार्तिकेय (स्कंद) की उपासना के लिए किया जाता है, जिन्होंने दैत्य तारकासुर का वध कर धर्म की रक्षा की थी। यह व्रत बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से शत्रुओं पर विजय, साहस, स्वास्थ्य और सफलता प्राप्त होती है। भक्त इस व्रत को मनोकामनाओं की पूर्ति, संकटों से मुक्ति और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा के लिए करते हैं। यह व्रत आत्मबल और आध्यात्मिक शक्ति को बढ़ाने वाला माना जाता है। आज स्कंद षष्ठी व्रत है, यहां पढ़ें स्कंद षष्ठी व्रत कथा, तारकासुर वध की कहानी।

Skanda Sashti Vrat Katha, Skanda Sashti 2026, 24 March

स्कंद षष्ठी व्रत कथा (Photo Credit - Ai Image)

Skanda Sashti Vrat Katha 2026 Pdf

पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक समय दैत्य तारकासुर ने कठोर तपस्या कर ब्रह्मा जी को प्रसन्न किया। अपनी तपस्या के बल पर उसने ऐसा वरदान प्राप्त कर लिया कि उसका वध केवल भगवान शिव के पुत्र द्वारा ही संभव होगा। यह वरदान पाकर वह अत्यंत अहंकारी हो गया। उसे यह विश्वास था कि माता सती के देह-त्याग के बाद भगवान शिव संसार से विरक्त होकर गहन तप में लीन हैं, इसलिए उनका विवाह और पुत्र होना लगभग असंभव है। इसी सोच के साथ उसने तीनों लोकों में अत्याचार और आतंक फैलाना शुरू कर दिया।

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