देश में सोते हुए शिव जी की मूर्ति कहां है: आंध्र प्रदेश में एक छोटी सी जगह है सुरुतापल्ली जो पल्लीकोंडेश्वर मंदिर की वजह से दुनिया भर के शिव भक्तों के बीच एक खास स्थान रखती है। इस मंदिर में शिव जी की प्रतिमा शयन मुद्रा में स्थापित है। यह मुद्रा आमतौर पर विष्णु जी से जुड़ी मानी जाती है। शिवजी की यह अनूठी और भक्ति भाव से जुड़ी प्रतिमा की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी है।
इस मंदिर में शयन मुद्रा में क्यों हैं भोलेनाथ (Pic: Wikipedia)
पल्लीकोंडेश्वर मंदिर में क्यों स्थापित हैं शयन करते शिव जी
मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जो हलाहल विष भोलेनाथ ने पिया था, उसकी वजह से उनको बेचैनी हो रही थी। तब वह यहां आराम करने के लिए रुके थे और माता पार्वती ने संभाला था। करुणा और प्रेम के इसी भाव को इस मंदिर में स्थापित दुर्लभ मूर्ति ने शिव भक्तों के बीच अमर कर दिया गया है। यहां भगवान शिव को पल्लीकोंडेश्वर अर्थात शय्या पर विराजमान भगवान के रूप में पूजा जाता है। वहीं मां पार्वती का सर्वमंगलाम्बिका का माना गया है जो कि संपूर्ण मंगल करने वाली हैं।
पल्लीकोंडेश्वर मंदिर की क्या विशेषता है
शिव भक्तों में इस मंदिर की खासी लोकप्रियता है। यहां प्रदोष व्रत के समय भक्तों की भारी भीड़ पहुंचती है। इस मंदिर की एक विशेषता ये भी है कि यहां भगवान शिव को मानव रूप में शयन मुद्रा में दर्शाया गया है। यहां आने वाले मंदिर की शिल्पकला से भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह पाते हैं। विजयनगर साम्राज्य के राजाओं ने इस लगभग 14वीं शताब्दी में इस मंदिर को बनवाया था।
पल्लीकोंडेश्वर मंदिर की विशेष जानकारी
- पल्लीकोंडेश्वर मंदिर कहां स्थित है: आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु की सीमा पर स्थित तिरुपति से लगभग 70 किलोमीटर दूर
- पल्लीकोंडेश्वर मंदिर में दर्शन का समय: सुबह 6:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक और शाम 3:30 बजे से रात 8:30 बजे तक प्रदोष व्रत के दिन मंदिर पूरे दिन खुला रहता है
- पल्लीकोंडेश्वर मंदिर में कौन सा त्योहार मनाते हैं: प्रदोष व्रत (महीने में दो बार), महाशिवरात्रि, और ऐप्पासी अन्नाभिषेकम
पल्लीकोंडेश्वर मंदिर कैसे पहुंच सकते हैं
इस मंदिर तक आने के लिए तिरुपति या चेन्नई से स्टेट रोडवेज बस सेवा ली जा सकती है। तिरुपति या नगला पुरम के अन्य प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन के साथ जोड़ कर भी इस मंदिर को देखने का प्लान बनाया जा सकता है।
