मंदिर दर्शन: यहां पार्वती माता की गोद में सिर रख कर सोते हैं भोलेनाथ, जानें क्यों इस मुद्रा में स्थापित है उनकी मूर्ति

Mandir Darshan Part 1: भोलेनाथ के भक्तों ने अक्सर उनकी मूर्ति को ध्यान मुद्रा या फिर आशीर्वाद की मुद्रा में ही देखा है। लेकिन देश में एक ऐसा अनूठा मंदिर है जहां शिव शंभू माता पार्वती की गोद में शयन मुद्रा में विराजे हैं। इस जगह को समुद्र मंथन के समय उनके हलाहल को पीने से जोड़ा जाता है। जानें इस मंदिर के बारे में और नोट करें कैसे व कब कर सकते हैं दर्शन।

देश में सोते हुए शिव जी की मूर्ति कहां है: आंध्र प्रदेश में एक छोटी सी जगह है सुरुतापल्ली जो पल्लीकोंडेश्वर मंदिर की वजह से दुनिया भर के शिव भक्तों के बीच एक खास स्थान रखती है। इस मंदिर में शिव जी की प्रतिमा शयन मुद्रा में स्थापित है। यह मुद्रा आमतौर पर विष्णु जी से जुड़ी मानी जाती है। शिवजी की यह अनूठी और भक्ति भाव से जुड़ी प्रतिमा की कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी है।

Pallikondeswara Temple in Andhra Pradesh

इस मंदिर में शयन मुद्रा में क्यों हैं भोलेनाथ (Pic: Wikipedia)

पल्लीकोंडेश्वर मंदिर में क्यों स्थापित हैं शयन करते शिव जी

मान्यता है कि समुद्र मंथन के समय जो हलाहल विष भोलेनाथ ने पिया था, उसकी वजह से उनको बेचैनी हो रही थी। तब वह यहां आराम करने के लिए रुके थे और माता पार्वती ने संभाला था। करुणा और प्रेम के इसी भाव को इस मंदिर में स्थापित दुर्लभ मूर्ति ने शिव भक्तों के बीच अमर कर दिया गया है। यहां भगवान शिव को पल्लीकोंडेश्वर अर्थात शय्या पर विराजमान भगवान के रूप में पूजा जाता है। वहीं मां पार्वती का सर्वमंगलाम्बिका का माना गया है जो कि संपूर्ण मंगल करने वाली हैं।

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