Shiv Naam Ka Arth: शिव नाम का संस्कृत में अर्थ और उसका महत्व

भगवान शिव देवों के देव महादेव हैं। ये त्रिदेव में से एक हैं। सनातन परंपरा में शिव के नाम का बहुत महत्व है। शिव जी के नाम का उच्चारण करने साधक की सारी मनोकामना पूरी होती है। शास्त्रों में शिव नाम की महिमा का बखान किया गया है। आइए जानते हैं शिव नाम का संस्कृत अर्थ।

Shiv Naam Ka Arth: शिव संस्कृत भाषा एक शब्द है, जिसका अर्थ है कल्याणकारी और शुभ कारी। शास्त्रों में शिव को कल्याण करने वाला बताया गया है। शि का मतलब होता है पापों का नाश करने वाला और व का अर्थ होता है देने वाला। इस कारण शिव को महा दानी भी माना जाता है। शिव इस साक्षात जगत में जो रूपों में विराजमान हैं। एक शिव का रूप साकार है और इस शिवलिंग के रूप में निराकार है। शिवलिंग का अर्थ होता है जो परम पुरुष प्रकृति के साथ समन्वित-चिह्न। भगवान शिव को अनेक नामों से पुकारा जाता है। महादेव, शंकर, भोलेनाथ आदि ये सभी शिव के ही नाम हैं। शिव के मानने वालों को शौव धर्म का माना जाता है। शिव के नाम को लेकर सबसे अपने- अपने मत हैं। कोई शिव को साकार रूप में मानकर व्याख्या कर रहा है तो कोई शिवलिंग के रूप में उनकी व्याख्या करता है।

शिव नाम का संस्कृत

शिव जी का नाम संस्कृत के शि और व धातु से मिलकर बना है। शि का अर्थ होता है पापों को नाश करने वाला और व का अर्थ होता देने वाला। इस तरह से शिव का अर्थ होता है शुभ और कल्याण करने वाला। भगवान शिव को सभी पापों का नाश करने वाला माना जाता है।

शास्त्र में शिव नाम का अर्थ

हिंदू धर्म में शिव के नाम का बहुत महत्व है। शिव के नाम का जाप करने से साधक का कल्याण होता है और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। यजुर्वेद में भगवान शिव के नाम का अर्थ शांतिदाता बताया गया है। जो शांत प्रिय है और शांति में लीन रहे वही शिव है।

शिव जी के और नाम

  • शिव
  • शंकर
  • महादेव
  • महाकाल
  • नीलकंठ
  • भोलेनाथ
  • त्रिनेत्र

शिव नाम का शब्दिक अर्थ

शिव नाम का यदि संधि विच्छेद किया जाए तो शि+व= शिव होगा। शि जो सभी पाप का नाश करने वाला और मंगल करने वाला हो। व जो दान दाता हो, कुछ देने वाला है। ऐसे में शिव का शब्दिक अर्थ हुआ। मंगल को देने वाला या मंगल करने वाला।

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