Sheetala Ashtami Vrat Katha: शीतला अष्टमी पर जरूर पढ़ें ये पौराणिक कथा, मिलेगा शीतला माता की आशीर्वाद, बसोड़ा की कथा

Sheetala Ashtami Vrat Katha (शीतला माता की कथा इन हिंदी): होली से आठवें दिन शीतला अष्टमी का त्योहार मनाया जाता है। इसे बसोड़ा भी कहते हैं। आज 11 मार्च को शीतला अष्टमी है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार शीतला अष्टमी पर यहां दिए व्रत कथा पाठ करने से चिकन पॉक्स, फोड़े, नेत्र विकार, खसरा और चेचक जैसे कई रोगों से छुटकारा मिल जाता है। यहां से आप बसोड़ा की कथा, शीतला अष्टमी की कथा पढ़ सकते हैं।

Sheetala Ashtami Vrat Katha (शीतला माता की कथा इन हिंदी): शीतला अष्टमी की पौराणिक कथा अनुसार, एक नगर में एक ब्राह्मण दंपति रहते थे। उनके दो बेटे और दो बहुएं थीं। दोनों बहुओं को काफी समय के बाद संतान हुए थे। इतने में शीतला अष्टमी का पर्व आया। घर में पर्व के अवसर पर ठंडा भोजन तैयार किया गया। उसी क्षण दोनों बहुओं के मन में विचार आया कि यदि ठंडा भोजन लेंगे तो बीमार हो जाएंगे और बच्चों पर भी असर हो सकता है। ऐसा सोचकर दोनों बहुओं ने पशुओं के दाने तैयार करने वाले बर्तन में गुप-चुप दो बाटी तैयार कर ली। इसके बाद सास-बहू शीतला माता की पूजा करके आई और कथा सुनी।

शीतला अष्टमी व्रत कथा (pc: pinterest)

फिर, सास शीतला माता का भजन करने बैठ गई। मगर, दोनों बहुएं बच्चे रोने का बहाना बनाकर घर चली गई। बरतन में रखे दाने का गरम-गरम रोटला निकालकर चूरमा तैयार की और दोनो ने पेटभर खा लिया। उधर, भजन के बाद सास घर आई तो बहुओं से भोजन करने के लिए कहा। बहुएं ठंडा भोजन करने का बोल कर घर के काम में लग गई। सास ने कहा, 'बच्चे कब से सोए हुए हैं, उन्हे जगाकर भोजन करा लो।'

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