Shattila Ekadashi 2023: षटतिला एकादशी व्रत है 18 को, पढ़ें क्यों जरूरी है तिल का दान, स्मरण करें कृष्ण का नाम

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 14, 2023, 01:42 AM IST

Shattila Ekadashi 2023: छह तरह के तिल दान करने के कारण षटतिला एकादशी नाम पड़ा। माघ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का है विशेष महत्व। तिल के दान के साथ तिल का सेवन देता है पुण्य लाभ। विधिवत पूजन से प्रसन्न होते हैं भगवान नारायण। हर माह आती हैं दो एकादशी। एकादशी के व्रत में श्रीकृष्ण के 54 नामों का अवश्य ही करें स्मरण।

KEY HIGHLIGHTS
  • माघ मास कृष्ण पक्ष की एकादशी है षटतिला एकादशी
  • छह प्रकार के तिल दान करने का होता है विशेष महत्व
  • श्रीकृष्ण के 54 नामों का जाप करता है व्रती का उद्धार

Shattila Ekadashi 2023: सृष्टि के आधार, भगवान शिव के आराध्य भगवान विष्णु को समर्पित एकादशी का व्रत 18 जनवरी को है। माघ मास में शुक्ल पक्ष की एकादशी को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। छह प्रकार के तिल का प्रयोग एवं दान इस एकादशी पर करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। प्रत्येक माह दो एकादशी के व्रत होते हैं। शुक्ल एवं कृष्ण पक्ष में 15 दिन के अंतराल पर एकादशी तिथि या ग्यारस पड़ती है। ये तिथि वैष्णव संप्रदाय, भगवान कृष्ण भक्तों के लिए विशेष महत्व रखती है। अधिकांश वैष्णव एकादशी का व्रत अवश्य ही रखते हैं। माघ मास में शुक्ल पक्ष की ग्यारस तिथि को षटतिला एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन छह प्रकार के तिल का दान एवं सेवन पुण्य फल देता है। एकादशी पर भूल से भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

Shattila Ekadashi 2023

षटतिला एकादशी व्रत है 18 को, करें तिल का दान

षटतिला एकादशी पर तिल का महत्व

षटतिला एकादशी पर छह तरह के तिल अथवा काले तिल का सेवन एवं दान महत्वपूर्ण बताया गया है। इस दिन तिल का दान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है। काले तिल का दान करने से शनि ग्रह शांत रहकर आशीर्वाद देते हैं। वहीं तिल में भरपूर आयरन होता है जोकि सर्दियों में सेहत के लिए वरदान की तरह है। यदि इस दिन तिल दान किये जाएं तो मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। काले तिल पाप का शमन करते हैं। इसलिए इस दिन दान के साथ ही तिल मिश्रित भाेजन का सेवन करना चाहिए।

End of Feed