Shabari Jayanti Katha: शबरी जयंती आज, करें इस पौराणिक कथा का पाठ तो माता शबरी जैसे मोक्ष पाएंगे आप

Shabari Jayanti Katha (शबरी जयंती की कथा): हिंदू धर्म में शबरी जयंती का विशेष महत्व है। इस दिन भगवान श्री राम की असीम कृपा पाकर माता शबरी मोक्ष गति को प्राप्त हुई थी। शास्त्रों के अनुसार यदि कोई व्यक्ति फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को भगवान राम की भक्ति श्रद्धा पूर्वक करें, तो उसे भी मोक्ष की प्राप्त होती है। साथ ही आज के दिन शबरी माता की कथा जरूर पढ़नी चाहिए।

Shabari Jayanti Katha (शबरी जयंती की कथा): पौराणिक मान्यताओं के अनुसार माता शबरी का जन्म भील समुदाय की शबर जाति में हुआ था। उनके पिता का नाम अज था, जो भील समुदाय के मुखिया थे, जबकि माता का नाम इन्दुमति था। बचपन में शबरी का नाम श्रमणा था। वे सरल स्वभाव और करुणामयी हृदय की थीं। समय के साथ वे अपनी जाति के नाम से पहचानी जाने लगीं और उनका नाम शबरी पड़ गया।

शबरी जयंती की कथा (AI Generated)

जब शबरी युवावस्था में पहुंचीं तो उनके विवाह की तैयारियां शुरू हुईं। उनके पिता ने भील समाज की परंपरा के अनुसार विवाह तय किया। विवाह भोज के लिए बड़ी संख्या में पशु और पक्षी कबीले में लाए गए। जब शबरी ने इसके पीछे का कारण जाना और उन्हें बताया गया कि इन्हीं पशु-पक्षियों से विवाह का भोजन बनेगा, तो उनका हृदय व्यथित हो उठा। वे इस हिंसक परंपरा से बेहद दुखी हो गईं। उन्हें निर्दोष जीवों की हत्या स्वीकार नहीं थी। उसी क्षण उन्होंने विवाह न करने का संकल्प लिया।

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