Sawan 2026 Ghar Par Rudrabhishek Karne ki Vidhi: भगवान शिव का प्रिय मास श्रावण (सावन) 30 जुलाई 2026 से शुरू हो चुका है और यह 28 अगस्त तक रहेगा। 3 अगस्त को सावन का पहला सोमवार है। सावन के सोमवार को शिवलिंग का अभिषेक करने का विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक और पंचामृत अभिषेक करने से वे शीघ्र प्रसन्न होते हैं। कई श्रद्धालु मंदिर नहीं जा पाते या घर पर ही भगवान शिव की पूजा करना चाहते हैं। ऐसे में यदि आपको विधि का सही क्रम पता हो तो आप घर पर ही पूरे विधि-विधान से शिवलिंग का अभिषेक कर सकते हैं।
घर पर रुद्राभिषेक कैसे करें
शिव पुराण, स्कन्द पुराण और लिङ्ग पुराण में शिवलिंग पूजन और अभिषेक की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। शैव परंपरा में अभिषेक केवल जल चढ़ाने तक सीमित नहीं है। पहले भगवान शिव का स्नान कराया जाता है, फिर उनका श्रृंगार किया जाता है और अंत में पूजन, मंत्र जाप, आरती तथा क्षमा प्रार्थना की जाती है। आइए जानते हैं घर पर भगवान शिव का अभिषेक करने की संपूर्ण विधि क्या है।
शिव पुराण के अनुसार अभिषेक का वास्तविक महत्व
शिव पुराण में भगवान शिव को अभिषेकप्रिय बताया गया है। जलधारा, पंचामृत और बिल्वपत्र से किया गया पूजन मन की शुद्धि, पापक्षय और शिवकृपा का माध्यम माना गया है। वहीं लिङ्ग पुराण में जलाभिषेक को समस्त अभिषेकों में सबसे सरल और सर्वसुलभ बताया गया है। यदि घर में शिवलिंग स्थापित है तो उसी का पूजन करें। यदि स्थायी शिवलिंग नहीं है तो शास्त्रों में वर्णित पार्थिव शिवलिंग (स्वच्छ मिट्टी से निर्मित) बनाकर भी पूजा की जा सकती है। शिव पुराण में पार्थिव लिंग पूजा का विशेष महत्व बताया गया है। यदि स्थायी या तांबे का शिवलिंग घर में स्थापित है तो उसके आकार और स्थापना-विधि के नियमों का पालन करना चाहिए। सूर्य डूबने के बाद प्रदोष काल में शिव का अभिषेक करना ज्यादा शुभ माना जाता है। इसके अलावा आप सुविधा के अनुसार किसी भी शुभ मुहूर्त में अभिषेक कर सकते हैं।
शिव अभिषेक के लिए आवश्यक सामग्री
पूजा शुरू करने से पहले सारी सामग्री एक स्थान पर रख लें।
- तांबे या पीतल का लोटा
- शुद्ध जल
- गंगाजल
- कच्चा दूध, इसके लिए स्टील का लोटा
- दही
- शुद्ध घी
- शहद
- गन्ने और अनार आदि फलों के रस (यदि उपलब्ध हो)
- शक्कर या मिश्री
- इत्र
- भस्म (विभूति)
- अष्टगंध
- चंदन
- अक्षत (साबुत चावल)
- फूलों की माला
- कमल का फूल (यदि उपलब्ध हो)
- सफेद या सुगंधित पुष्प, आक पुष्प, पीले कनेर का फूल
- भांग, शमी पत्र
- धतूरा, बेलफल
- बेलपत्र (तीन पत्ती या इससे ऊपर की पत्तियों वाला)
- मौसमी फल
- नैवेद्य (मिठाई)
- धूप और घी का दीपक
- दक्षिणा (कुछ भी 11 रुपये से लेकर श्रद्धा के अनुसार)
अभिषेक शुरू करने से पहले क्या करें
प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थान को साफ करें और भगवान गणेश का स्मरण करें और धूप व घी का दीपक जला लेँ। इसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती का ध्यान करते हुए संकल्प लें कि आप श्रद्धापूर्वक अभिषेक और पूजा करेंगे। अभिषेक से पहले आपको भगवान गणेश माता गौरा, कार्तिकेय और नंदी जी की पूजा कर लेनी है। इसमें भी सबसे पहले भगवान गणेश को जल अर्पित करें, उन्हें भोग लगाएं। इसके बाद जल और भोग व श्रृंगार का सामान माता गौरा को अर्पित करें। अब कार्तिकेय जी को भोग, फूल आदि अर्पित करें। इसके बाद नंदी जी को भोग, बेलपत्र आदि अर्पित करें। इस दौरान याद रखें कि भांग, धतूरा आदि भगवान शिव के परिवार को अर्पित न करें। भांग और धतूरा भगवान शिव को ही अर्पित करें। अब 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करते हुए अभिषेक प्रारंभ करें। अभिषेक करते समय अपना मुख उत्तर या पूर्व दिशा में रखें।
अभिषेक करते समय 12 ज्योतिर्लिंगों का करें स्मरण
सौराष्ट्रे सोमनाथं च श्रीशैले मल्लिकार्जुनम् ।
उज्जयिन्यां महाकालम्ॐकारममलेश्वरम् ॥१॥
परल्यां वैद्यनाथं च डाकिन्यां भीमाशंकरम् ।
सेतुबंधे तु रामेशं नागेशं दारुकावने ॥२॥
वाराणस्यां तु विश्वेशं त्र्यंबकं गौतमीतटे ।
हिमालये तु केदारम् घुश्मेशं च शिवालये ॥३॥
एतानि ज्योतिर्लिङ्गानि सायं प्रातः पठेन्नरः ।
सप्तजन्मकृतं पापं स्मरणेन विनश्यति ॥४॥
पहला चरण: शुद्ध जल से अभिषेक
सबसे पहले भगवान शिव को शुद्ध जल अर्पित करें। यदि संभव हो तो जल की निरंतर धारा बहाएं। अन्यथा तीन, पांच या ग्यारह बार जल अर्पित कर सकते हैं।
दूसरा चरण: दूध से अभिषेक
अब कच्चे दूध से शिवलिंग का अभिषेक करें। दूध अर्पित करने के बाद पुनः शुद्ध जल से शिवलिंग को स्नान कराएं।
तीसरा चरण: घी से अभिषेक
अब थोड़ा-सा शुद्ध घी अर्पित करें। इसके बाद फिर से जल अर्पित करें ताकि शिवलिंग स्वच्छ रहे।
चौथा चरण: शहद से अभिषेक
अब भगवान शिव को शहद अर्पित करें। इसके बाद पुनः शुद्ध जल अर्पित करें।
पांचवां चरण: फलों के रस से अभिषेक
यदि गन्ने का रस उपलब्ध हो तो उससे भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके साथ ही आप अनार का रस और अन्य फलों के रस अर्पित कर सकते हैं।। इसके बाद फिर से जल अर्पित करें।
छठा चरण: शक्कर या मिश्री
अब भगवान शिव को शक्कर या मिश्री अर्पित करें। इसके बाद पुनः जल से स्नान कराएं।
सातवां चरण: दही से अभिषेक
अब दही अर्पित करें। इसके बाद एक बार फिर शुद्ध जल से शिवलिंग का स्नान कराएं।
आठवां चरण: गंगाजल करें अर्पित
अंत में भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करें। इसे अभिषेक का अंतिम स्नान माना जाता है।
अब करें भगवान शिव का श्रृंगार
अभिषेक पूरा होने के बाद शिवलिंग को हल्के हाथों से साफ करें। सबसे पहले शिवलिंग पर वस्त्र और जनेऊ अर्पित करें। अगर वस्त्र एकदम सफेद हो तो उस पर थोड़ी सा अष्टगंध लगा सकते हैं। इसके बाद इत्र अर्पित करें, फिर भस्म (विभूति) लगाएं। इसके बाद अष्टगंध और फिर चंदन अर्पित करें। अंत में अक्षत चढ़ाएं। अक्षत यानि चावल के दाने टूटे हुए न हो। चावल के दाने के साथ ही आप जौ, काले तिल, हरी साबूत मूंग दाल आदि भी अर्पित कर सकते हैं।
अब पूजन सामग्री अर्पित करें
श्रृंगार पूरा होने के बाद भगवान शिव को क्रमशः फूलों की माला, कमल का फूल, अन्य सुगंधित पुष्प, आक पुष्प, कमलगट्टा, भांग, शमी पत्र, बेलफल, धतूरा, मौसमी फल और नैवेद्य (मिठाई) अर्पित करें।
बेलपत्र अर्पित करने की विधि
पूजन के अंत में भगवान शिव को बेलपत्र अर्पित करें। बेलपत्र चढ़ाते समय उसका चिकना भाग शिवलिंग की ओर रखें। इसके साथ ही बेलपत्र में कुछ चावल के दाने लगा सकते हैं। चावल खंडित नहीं होने चाहिए। प्रत्येक बेलपत्र अर्पित करते समय यह मंत्र बोलें-
त्रिदलं त्रिगुणाकारं त्रिनेत्रं च त्रियायुधम्।
त्रिजन्मपापसंहारं एकबिल्वं शिवार्पणम्॥
इसके साथ प्रत्येक बेलपत्र पर 'ॐ नमः शिवाय' का उच्चारण भी करें। इस दौरान महामृत्युंजय मंत्र भी बोल सकते हैं।
मंत्र जाप
अब कम से कम 108 बार 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। यदि समय हो तो 11 या 21 बार महामृत्युंजय मंत्र का भी जप करें।
धूप, दीप और आरती
अब भगवान शिव को धूप अर्पित करें। इसके बाद घी का दीपक जलाकर पहले गणेश जी की फिर माता गौरा और अंत में शिवजी की आरती करें। पूरे परिवार के साथ आरती करना शुभ माना जाता है।
दक्षिणा अर्पित करें
यदि आपने संकल्प लेकर पूजा की है तो अपनी श्रद्धा के अनुसार दक्षिणा अलग रख दें। इसके बाद में इसे किसी मंदिर, ब्राह्मण, गौशाला या जरूरतमंद व्यक्ति को दान कर दें।
अंत में करें क्षमा प्रार्थना
पूजा पूर्ण होने के बाद दोनों हाथ जोड़कर भगवान शिव से क्षमा याचना करें।
आवाहनं न जानामि न जानामि तवार्चनम्।
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
मन्त्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं महेश्वर।
यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
अंत में भगवान शिव को प्रणाम करें और नैवेद्य को प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों में वितरित करें।
शिव पुराण अनुसार: 8 द्रव्यों की शास्त्रीय अभिषेक टेबल
| चरण | द्रव्य (सामग्री) | शास्त्र-सम्मत पात्र (Utensil) | पुराण संदर्भ एवं विशेष नियम |
| 1 | शुद्ध जल | तांबा (Copper) | विद्येश्वर संहिता: जलाभिषेक से मन की शुद्धि और पापों का शमन होता है। निरंतर धारा से अर्पित करें। |
| 2 | कच्चा दूध | चांदी / पीतल | कोटिरुद्र संहिता: तांबे के पात्र में दूध वर्जित है (तांबे से संपर्क में दूध विषतुल्य माना गया है)। |
| 3 | दही | पीतल / कांस्य | पारिवारिक सुख और आरोग्य के लिए अर्पित करें। दही अर्पण के तुरंत बाद जल से पुनः स्नान कराएं। |
| 4 | शुद्ध घी | चांदी / पीतल | वंश वृद्धि और शारीरिक बल के लिए। घी अर्पित करने के बाद उष्ण जल या शुद्ध जल अर्पित करें। |
| 5 | शहद (मधु) | चांदी / पीतल | वाणी शुद्धि और रोगों के नाश के लिए। |
| 6 | शक्कर / गन्ने का रस | पीतल / चांदी | आनंद और लक्ष्मी प्राप्ति के लिए। |
| 7 | गंगाजल | तांबा / चांदी | लिंग पुराण: पंचामृत के बाद पुनः गंगाजल/शुद्ध जल अर्पित करना अनिवार्य है ताकि शिवलिंग स्वच्छ रहे। |
| 8 | अष्टगंध व चंदन | काष्ठ / चांदी | त्रिपुंड लगाएं और बिना टूटा (अक्षत) चावल अर्पित करें। |
अभिषेक के बाद यह प्रार्थना अवश्य करें
पूजा पूर्ण होने पर दोनों हाथ जोड़कर भगवान शिव से प्रार्थना करें।
'हे देवाधिदेव महादेव! मेरे परिवार में धर्म, आरोग्य, सुख, शांति और सद्बुद्धि बनाए रखें। जाने-अनजाने में हुई पूजा की त्रुटियों को क्षमा करें और अपनी कृपा बनाए रखें।'
पूजा को मिलती है पूर्णता
सावन में भगवान शिव का अभिषेक श्रद्धा, भक्ति और शुद्ध भाव से किया जाता है। यदि पूजा का क्रम व्यवस्थित रखा जाए तो घर पर भी पूरी विधि से शिव अभिषेक किया जा सकता है। जलाभिषेक, पंचामृत अभिषेक, शिवलिंग का श्रृंगार, बेलपत्र अर्पण, मंत्र जाप, आरती और क्षमा प्रार्थना, इन सभी चरणों के साथ किया गया अभिषेक सावन के सोमवार की पूजा को पूर्णता प्रदान करता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी पुराणों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
