Santoshi Mata Chalisa: हिंदू धर्म में शुक्रवार का दिन मां संतोषी को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से मां संतोषी की पूजा करने से जीवन में सुख, शांति और संतोष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से आर्थिक परेशानियों, पारिवारिक तनाव और मन की इच्छाओं की पूर्ति के लिए भक्त शुक्रवार का व्रत रखते हैं और संतोषी माता की चालीसा (Chalisa) का पाठ करते हैं। कहा जाता है कि नियमित रूप से चालीसा का जाप करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और घर में खुशहाली का वातावरण बनता है।
मां संतोषी की चालीसा लिखित में ( pinterest)
संतोषी माता चालीसा लिरिक्स (Santoshi Mata Chalisa Lyrics in Hindi)
दोहा
बन्दौं सन्तोषी चरण रिद्धि-सिद्धि दातार ।
ध्यान धरत ही होत नर दुःख सागर से पार ॥
भक्तन को सन्तोष दे सन्तोषी तव नाम ।
कृपा करहु जगदम्ब अब आया तेरे धाम ॥
चौपाई
जय सन्तोषी मात अनूपम । शान्ति दायिनी रूप मनोरम ॥
सुन्दर वरण चतुर्भुज रूपा । वेश मनोहर ललित अनुपा ॥
श्वेताम्बर रूप मनहारी । माँ तुम्हारी छवि जग से न्यारी ॥
दिव्य स्वरूपा आयत लोचन । दर्शन से हो संकट मोचन ॥
जय गणेश की सुता भवानी । रिद्धि- सिद्धि की पुत्री ज्ञानी ॥
अगम अगोचर तुम्हरी माया । सब पर करो कृपा की छाया ॥
नाम अनेक तुम्हारे माता । अखिल विश्व है तुमको ध्याता ॥
तुमने रूप अनेकों धारे । को कहि सके चरित्र तुम्हारे ॥
धाम अनेक कहाँ तक कहिये । सुमिरन तब करके सुख लहिये ॥
विन्ध्याचल में विन्ध्यवासिनी । कोटेश्वर सरस्वती सुहासिनी ॥
कलकत्ते में तू ही काली । दुष्ट नाशिनी महाकराली ॥
सम्बल पुर बहुचरा कहाती । भक्तजनों का दुःख मिटाती ॥
ज्वाला जी में ज्वाला देवी । पूजत नित्य भक्त जन सेवी ॥
नगर बम्बई की महारानी । महा लक्ष्मी तुम कल्याणी ॥
मदुरा में मीनाक्षी तुम हो । सुख दुख सबकी साक्षी तुम हो ॥
राजनगर में तुम जगदम्बे । बनी भद्रकाली तुम अम्बे ॥
पावागढ़ में दुर्गा माता । अखिल विश्व तेरा यश गाता ॥
काशी पुराधीश्वरी माता । अन्नपूर्णा नाम सुहाता ॥
सर्वानन्द करो कल्याणी । तुम्हीं शारदा अमृत वाणी ॥
तुम्हरी महिमा जल में थल में । दुःख दारिद्र सब मेटो पल में ॥
जेते ऋषि और मुनीशा । नारद देव और देवेशा ।
इस जगती के नर और नारी । ध्यान धरत हैं मात तुम्हारी ॥
जापर कृपा तुम्हारी होती । वह पाता भक्ति का मोती ॥
दुःख दारिद्र संकट मिट जाता । ध्यान तुम्हारा जो जन ध्याता ॥
जो जन तुम्हरी महिमा गावै । ध्यान तुम्हारा कर सुख पावै ॥
जो मन राखे शुद्ध भावना । ताकी पूरण करो कामना ॥
कुमति निवारि सुमति की दात्री । जयति जयति माता जगधात्री ॥
शुक्रवार का दिवस सुहावन । जो व्रत करे तुम्हारा पावन ॥
गुड़ छोले का भोग लगावै । कथा तुम्हारी सुने सुनावै ॥
विधिवत पूजा करे तुम्हारी । फिर प्रसाद पावे शुभकारी ॥
शक्ति-सामरथ हो जो धनको । दान-दक्षिणा दे विप्रन को ॥
वे जगती के नर औ नारी । मनवांछित फल पावें भारी ॥
जो जन शरण तुम्हारी जावे । सो निश्चय भव से तर जावे ॥
तुम्हरो ध्यान कुमारी ध्यावे ।निश्चय मनवांछित वर पावै ॥
सधवा पूजा करे तुम्हारी । अमर सुहागिन हो वह नारी ॥
विधवा धर के ध्यान तुम्हारा । भवसागर से उतरे पारा ॥
जयति जयति जय संकट हरणी । विघ्न विनाशन मंगल करनी ॥
हम पर संकट है अति भारी । वेगि खबर लो मात हमारी ॥
निशिदिन ध्यान तुम्हारो ध्याता । देह भक्ति वर हम को माता ॥
यह चालीसा जो नित गावे । सो भवसागर से तर जावे ॥
दोहा
संतोषी माँ के सदा बंदहूँ पग निश वास ।
पूर्ण मनोरथ हो सकल मात हरौ भव त्रास ॥
संतोषी माता कौन हैं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां संतोषी को भगवान गणेश की पुत्री माना जाता है। ‘संतोष’ यानी संतुष्टि और मानसिक शांति का संदेश देने के कारण उन्हें संतोषी माता कहा जाता है। कहा जाता है कि जहां संतोष होता है, वहां समृद्धि अपने आप आती है। यही कारण है कि मां संतोषी की पूजा विशेष रूप से उन लोगों द्वारा की जाती है जो जीवन में स्थिरता, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख चाहते हैं।
लोकमान्यता के अनुसार मां संतोषी अपने भक्तों की छोटी से छोटी प्रार्थना भी सुनती हैं। उनकी पूजा में आडंबर की जगह सरलता और श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है।
संतोषी माता का व्रत कैसे करें
संतोषी माता का व्रत सामान्यतः लगातार 16 शुक्रवार तक रखा जाता है। व्रत की शुरुआत किसी भी शुभ शुक्रवार से की जा सकती है। सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और पूजा स्थान पर मां संतोषी की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। इसके बाद दीपक जलाएं, जल अर्पित करें और गुड़ व भुने चने का भोग लगाएं।
व्रत का सबसे महत्वपूर्ण नियम है - खट्टा भोजन नहीं करना और न ही किसी को खिलाना। मान्यता है कि व्रत के दौरान खट्टा खाने से व्रत का फल बाधित हो सकता है। पूजा के बाद संतोषी माता की कथा और चालीसा का पाठ अवश्य करें। दिन भर संयम रखें और शाम को आरती के बाद प्रसाद ग्रहण करें।
16वें शुक्रवार को व्रत का उद्यापन किया जाता है, जिसमें बच्चों को भोजन कराकर प्रसाद बांटा जाता है। श्रद्धा और संतोष के साथ किया गया यह व्रत जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने वाला माना जाता है।
