नवरात्रि में क्यों खास है 'दिव्य स्त्रैण'? पढ़ें शक्ति की भक्ति पर सद्गुरु के 9 अनमोल विचार

सद्गुरु के अनुसार, जिस दिन इंसान अपने भीतर के पौरुष और स्त्रैण के संतुलन को समझ लेता है, उसी दिन उसका जीवन रूपांतरित होने लगता है।

नवरात्रि अस्तित्व के सबसे जीवंत और शक्तिशाली पहलू 'दिव्य स्त्रैण' का उत्सव है। अमूमन हम देवी को केवल पूजा-पाठ और मूर्तियों तक सीमित कर देते हैं, लेकिन योग परंपरा और सद्गुरु के दर्शन में स्त्रैण को लिंग से परे, संपूर्ण ब्रह्मांड की एक मूल ऊर्जा और चेतना के रूप में देखा गया है।

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दिव्य नारी शक्ति पर सद्गुरु के 9 अनमोल विचार

पारंपरिक रूप से नवरात्रि को नौ रातों में विभाजित किया गया है, जो मुख्य रूप से तीन आयामों- दुर्गा (शक्ति और सक्रियता), लक्ष्मी (समृद्धि और पोषण) और सरस्वती (ज्ञान और मोक्ष) का प्रतिनिधित्व करती हैं। यह यात्रा तमोगुण से रजोगुण और अंततः सत्वगुण से परे जाकर परम मुक्ति पाने का प्रतीक है।

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