Famous Mandir in Prayagraj (प्रयागराज के फेमस मंदिर): प्रयागराज एक ऐसा शहर है जहां पर वैदिक काल की तीन प्रमुख नदियों का संगम देखने को मिलता है गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती। इन नदियों के पावन मिलन को देखने के लिए यहां लोग दूर-दूर से आते हैं और त्रिवेणी संगम के पवित्र जल में स्नान करके अपने पापों से मुक्त होते हैं। प्रयागराज सिर्फ महाकुंभ मेले के लिए ही नहीं जाना जाता है बल्कि यहां कुछ ऐसे पुराने और दुर्लभ मंदिर भी हैं जिनके दर्शन बड़े ही सौभग्य से मिलते हैं। मान्यताओं के अनुसार हर मंदिर भारतीय सनातन धर्म की किसी न किसी घटना को दर्शाते हैं, जिनके बारे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं। प्रयागराज के ये फेमस मंदिर आपके मन को शांति प्रदान करेंगे और आपको जीवन भर का अनोखा अनुभव देंगे। यहां पर देखें प्रयागराज के फेमस मंदिर।
Famous Mandir in Prayagraj
Famous Mandir in Prayagraj (प्रयागराज के फेमस मंदिर)
आप यहां पर प्रयागराज के प्राचीन और प्रख्यात मंदिरों को देख सकते हैं जहां जीवन में एक बार जाना तो बनता है –
प्राचीन हनुमान मंदिर
प्रयागराज में संगम किनारे हनुमान जी का बेहद ही अनोखा मंदिर मौजूद है। इस मंदिर में हनुमान जी की लेटी हुई प्रतिमा की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कुंभ मेले के संगम स्नान का पुण्य तभी प्राप्त होता है जब हनुमान जी के दर्शन किए जाए।
वेणी माधव मंदिर
जगत के पालनहार भगवान विष्णु ने संसार के कल्याण के लिए कई रूप लिए हैं लेकिन प्रयागराज के संगम क्षेत्र के दारागंज मोहल्ले में मौजूद इस मंदिर में भगवान विष्णु को वेणी माधव के रूप में पूजा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि वेणी माधव के दर्शन के बिना संगम स्नान पूरा नहीं होता है साथ ही ये प्राचीन मंदिर प्रयागराज की पंचकोसी परिक्रमा का केंद्र भी है।
अलोपशंकरी देवी मंदिर
मां दुर्गा के कई स्वरूप हैं जिनके दर्शन के लिए भक्त शक्तिपीठ जाते हैं। संगम नगरी प्रयागराज में माता सती का एक ऐसा ही शक्तिपीठ मौजूद है जहां माता रानी की कोई मूर्ति नहीं है और न ही किसी अंग का मूर्त रूप है। अलोपशंकरी देवी के नाम से प्रख्यात इस मंदिर में लाल चुनरी में लिपटे एक पालने का पूजन और दर्शन सदियों से चलता आ रहा, जहां पर हजारों भक्तों की भीड़ होती है।
कल्याणी देवी मंदिर
धार्मिक नगरी प्रयागराज के पुराने शहर में स्थित कल्याणी देवी मंदिर का पौराणिक और ऐतिहासिक रूप से विशेष महत्व है जिसे मान्यताओं के अनुसार शक्तिपीठ भी कहा जाता है। यहां माता के दर्शन-पूजन के लिए शहर के अलावा देश के विभिन्न क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
शंकर विमान मंडपम
अद्भुत कलाकृति और वास्तुकला का अनूठा नमूना पेश करने वाले इस तीन मंजिले मंदिर का निर्माण कांचिकामकोटि 69वें पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी जयेंद्र सरस्वती ने अपनी गुरु की इच्छापूर्ति के लिए करवाया था। मंदिर का पहला तल कांचिकामकोटि पीठ की आराध्य कामाक्षी देवी को समर्पित है और दूसरा तल भगवान विष्णु के बाला जी स्वरूप को है वहीं तीसरा तल योग सहस्त्र लिंग एक पत्थर पर बना है।
(डिसक्लेमर- इस लेख में दी गई जानकारी मान्यताओं पर आधारित है। timesnowhindi.com इसकी सटीकता या विश्वसनीयता की पुष्टि नहीं करता है। इसलिए किसी भी जानकारी या मान्यता को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ की राय जरूर लें।)
