Pitru Paksha 2026 Food Rules: पितृपक्ष के दिनों में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान के साथ खान-पान को लेकर भी खास नियम बताए गए हैं। इस अवधि में भोजन को सात्विक रखना चाहिए। खास तौर पर श्राद्ध वाले दिन ऐसा भोजन करने की परंपरा है जो सादा, शुद्ध और आसानी से पचने वाला हो।
पितृपक्ष में क्या खाएं (Image AI Generated and Newsroom Verified)
पितृपक्ष के दौरान प्याज-लहसुन, मांसाहार और शराब जैसी चीजों से दूरी रखनी चाहिए। वहीं, चावल, गेहूं, जौ, मूंग की दाल, दूध, घी, तिल और मौसमी फल-सब्जियों को भोजन में शामिल किया जा सकता है। हालांकि अलग-अलग परिवारों और क्षेत्रों में श्राद्ध के भोजन को लेकर कुछ नियम अलग हो सकते हैं। 26 सितंबर को पूर्णिमा श्राद्ध और 27 सितंबर को प्रतिपदा श्राद्ध के साथ ही पितृपक्ष शुरू हो चुके हैं, जो 10 अक्टूबर तक चलेंगे। ऐसे में आइए जानते हैं कि इन पूरे 16 दिनों में क्या खाएं और क्या नहीं खाएं।
पितृपक्ष में क्या खाएं
पितृपक्ष में भोजन को जितना हो सके सादा और सात्विक रखने की परंपरा है। चावल, गेहूं, जौ और मूंग की दाल जैसे अनाज और दालें भोजन का हिस्सा बनाए जा सकते हैं। घर में साधारण दाल, चावल, रोटी और हल्की सब्जी तैयार की जा सकती है। बहुत अधिक मसाले, तेल और तीखे स्वाद से बचते हुए घर का ताजा भोजन करना इस अवधि में बेहतर माना जाता है।
चावल और जौ को भोजन में शामिल करें
श्राद्ध कर्म में चावल का विशेष महत्व माना जाता है। पिंडदान में भी चावल का इस्तेमाल किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान सादा चावल या खिचड़ी जैसे भोजन लिए जा सकते हैं। जौ को भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और इसे भोजन या पितृकर्म से जुड़ी सामग्री में इस्तेमाल किया जाता है।
मूंग की दाल खाएं
पितृपक्ष में मूंग की दाल को सात्विक भोजन का हिस्सा माना जाता है। इसे कम मसाले में पकाकर खाया जा सकता है। मूंग की दाल के साथ सादा चावल या रोटी ली जा सकती है।
दूध, घी और शहद का इस्तेमाल करें
पितृकर्म में दूध, घी और शहद का विशेष महत्व माना जाता है। श्राद्ध के भोजन और तर्पण में इनका इस्तेमाल किया जाता है।
खीर बनाएं
श्राद्ध के भोजन में खीर को प्रमुख व्यंजनों में शामिल किया जाता है। दूध और चावल से बनी खीर पितरों के निमित्त भोग में रखी जाती है और बाद में प्रसाद के रूप में ग्रहण की जाती है। खीर में चीनी या गुड़ का इस्तेमाल किया जा सकता है।
मौसमी सब्जियां खाएं
पितृपक्ष में लौकी, तोरई, परवल, भिंडी, कद्दू और कच्चे केले जैसी मौसमी सब्जियां भोजन में शामिल की जा सकती हैं। इन्हें कम तेल और मसालों में पकाना बेहतर माना जाता है। ऐसी सब्जियों से सादा भोजन तैयार किया जा सकता है, जो श्राद्ध के दौरान रखे जाने वाले सात्विक आहार के अनुरूप होता है।
फल खाएं
पितृपक्ष में मौसमी फलों को भी भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है। सेब, संतरा, नाशपाती और दूसरे ताजे मौसमी फल लिए जा सकते हैं। फल खास तौर पर उन लोगों के लिए भी उपयोगी विकल्प हो सकते हैं जो किसी दिन हल्का भोजन रखना चाहते हैं।
काले तिल का इस्तेमाल करें
काले तिल का पितृकर्म में विशेष महत्व माना जाता है। तर्पण और श्राद्ध की कई विधियों में काले तिल का इस्तेमाल किया जाता है। कुछ परिवार अपने भोजन में भी तिल का उपयोग करते हैं।
पितृपक्ष में क्या नहीं खाएं
पितृपक्ष के दौरान सात्विक भोजन की परंपरा के कारण प्याज और लहसुन का सेवन नहीं किया जाता। खासकर जिस दिन श्राद्ध कर्म हो, उस दिन इनके इस्तेमाल से बचा जाता है। भोजन में स्वाद बढ़ाने के लिए सादा मसाला, जीरा, धनिया आदि का इस्तेमाल अपनी पारिवारिक परंपरा के अनुसार किया जा सकता है।
मांस, मछली और अंडा न खाएं
पितृपक्ष में मांसाहारी भोजन से दूरी रखने की परंपरा है। मांस, मछली और अंडे को इस अवधि में भोजन का हिस्सा न बनाएं। श्राद्ध के दिनों में भोजन को पूरी तरह शाकाहारी और सात्विक रखने पर जोर रहता है।
शराब और दूसरे नशीले पदार्थों से दूर रहें
पितृपक्ष को संयम का समय माना जाता है। ऐसे में शराब और दूसरे नशीले पदार्थों का सेवन करने से बचना चाहिए। खास तौर पर श्राद्ध और तर्पण वाले दिन नशे से पूरी तरह दूरी बनाए रखें।
मसूर की दाल से परहेज करें
पितृपक्ष के दौरान मसूर की दाल को वर्जित माना जाता है। खास तौर पर श्राद्ध के भोजन में मसूर का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। इसकी जगह मूंग की दाल का इस्तेमाल किया जा सकता है।
चना और चने की दाल न लें
पितृपक्ष में चना और चने की दाल से भी परहेज किया जाता है। श्राद्ध के भोजन में इनके स्थान पर दूसरी सात्विक दालों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
जमीन के नीचे उगने वाली सब्जियां
पितृपक्ष में कुछ परंपराओं के अनुसार मूली, गाजर, शलजम, चुकंदर, अरबी और दूसरी जड़ वाली सब्जियों को भोजन में शामिल नहीं किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान बैंगन से भी परहेज करें।
बासी और जूठा भोजन न करें
पितृपक्ष में भोजन की शुद्धता पर ध्यान दें। ऐसे में बासी भोजन खाने के बजाय ताजा खाना तैयार करना बेहतर माना जाता है। श्राद्ध के भोजन को विशेष स्वच्छता और श्रद्धा के साथ तैयार किया जाता है। पितृपक्ष के दौरान पिज्जा, बर्गर, चिप्स, पैकेज्ड स्नैक्स और बहुत ज्यादा प्रोसेस्ड या जंक फूड से दूरी रखना बेहतर माना जाता है। इस दौरान घर का बना ताजा और सादा भोजन करें।
श्राद्ध के दिन कैसा होना चाहिए भोजन
श्राद्ध के दिन भोजन जितना सादा रखा जाए उतना बेहतर माना जाता है। घर में उपलब्ध सामग्री से दाल, चावल, रोटी, सब्जी, खीर और फल तैयार किए जा सकते हैं। भोजन में प्याज-लहसुन, मांसाहार और नशीली चीजों को शामिल नहीं किया जाता है। कई घरों में श्राद्ध के भोजन में खास व्यंजन परिवार की परंपरा के अनुसार बनाए जाते हैं। भोजन तैयार करते समय साफ-सफाई का ध्यान रखना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी शास्त्रों पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
