Pitru Paksha 2025: आमतौर पर तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि कार्य घर के पुरुष ही करते हैं। लेकिन, ऐसे किसी पूर्वज का श्राद्ध कैसे हो, जिसके पुत्र ही न रहा हो? ऐसे में मन में सवाल आता है कि क्या महिलाएं श्राद्ध, तर्पण या पिंडदान कर सकती हैं या नहीं? अब पितृपक्ष चल रहा है। ऐसे में तो आपको यहां से सभी जरूरी सवालों के जवाब मिलेंगे।
कौन करते हैं श्राद्ध और तर्पण?
अगर परिवार में किसी की मृत्यु होती है तो पुत्र को श्राद्ध और तर्पण का अधिकार होता है। वहीं, अगर किसी पिता के एक से अधिक बेटे हैं तो फिर बड़े बेटे को ही अंतिम संस्कार करना चाहिए। लेकिन अगर कोई बेटा नहीं हो तो पोता, प्रपौत्र, भतीजा, पिता, बहु, बहन भी श्राद्ध कर सकते हैं।
क्या बेटियां श्राद्ध कर सकती हैं?
कुछ ग्रंथों में पुत्र को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन कहीं भी ऐसा नहीं कहा गया है कि पुत्री को यह अधिकार नहीं है। श्राद्ध का मूल उद्देश्य है श्रद्धा पूर्वक पितरों का तर्पण और स्मरण। अगर बेटा नहीं है, तो बेटियां भी यह कार्य कर सकते हैं। गरुड़ पुराण और विष्णु धर्मसूत्र जैसे ग्रंथों में लचीलापन देखने को मिलता है कि पितरों का तर्पण कोई भी कर सकता है जो श्रद्धा और विधि से कार्य करे।
क्या लड़कियां तर्पण कर सकती हैं?
तर्पण का अर्थ होता है तृप्त करना। यह एक धार्मिक क्रिया है जिसमें जल, तिल और कुश आदि के माध्यम से पितरों, ऋषियों और देवताओं को श्रद्धा से अर्पण किया जाता है ताकि उनकी आत्मा को शांति मिले। वेदों और उपनिषदों में तर्पण करने के लिए लिंग को कोई विशेष बाध्यता नहीं दी गई है। अगर बेटा नहीं है तो बेटियां भी तर्पण कर सकती हैं।
