November 2026 Chaturthi Vrat Dates: नवंबर 2026 का महीना भगवान गणेश की पूजा और व्रत के लिहाज से खास रहने वाला है। इस महीने गणपति बप्पा के भक्तों को दो प्रमुख चतुर्थी व्रत रखने का अवसर मिलेगा। इनमें एक विनायक चतुर्थी और दूसरा गणाधिप संकष्टी चतुर्थी व्रत है।
नवंबर में चतुर्थी व्रत की डेट्स क्या हैं, जानें गणेश जी की पूजा के ये शुभ दिन कब पड़ेंगे (AI Image)
हिंदू धर्म में चतुर्थी तिथि भगवान गणेश को समर्पित मानी जाती है। मान्यता है कि इस दिन सच्चे मन से गणपति की पूजा करने और व्रत रखने से जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। घर में सुख-समृद्धि आती है और नए कामों में आने वाली बाधाएं कम होती हैं। अगर आप भी नवंबर में गणेश जी का व्रत रखने की तैयारी कर रहे हैं, तो यहां जानिए दोनों चतुर्थी की सही तारीख, महत्व और पूजा से जुड़ी जरूरी बातें।
नवंबर 2026 में चतुर्थी व्रत कब-कब हैं
पंचांग के अनुसार, नवंबर 2026 में ये दो प्रमुख चतुर्थी व्रत आएंगे -
- लाभ चतुर्थी (विनायक चतुर्थी): 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
- गणाधिप संकष्टी चतुर्थी: 27 नवंबर 2026, शुक्रवार
दोनों व्रतों की पूजा विधि और महत्व अलग-अलग है। विनायक चतुर्थी शुक्ल पक्ष में आती है, जबकि संकष्टी चतुर्थी कृष्ण पक्ष में मनाई जाती है।
नवंबर 2026 में पहला चतुर्थी व्रत कब है
नवंबर में पहली चतुर्थी 13 नवंबर, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इसे लाभ चतुर्थी, विनायक चतुर्थी और कार्तिक शुक्ल चतुर्थी के नाम से जाना जाता है। इस दिन भगवान गणेश के भक्त व्रत रखते हैं और दोपहर के समय उनकी विशेष पूजा करते हैं। मान्यता है कि लाभ चतुर्थी पर गणपति की आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि आती है। कारोबार और नए कामों में तरक्की के रास्ते खुलते हैं।
लाभ चतुर्थी 2026 की तिथि और मुहूर्त
- तारीख: 13 नवंबर 2026, शुक्रवार
- चतुर्थी तिथि शुरू: 12 नवंबर को शाम 6:09 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 13 नवंबर को रात 8:42 बजे
- गणेश पूजा का मध्याह्न मुहूर्त: सुबह 11:01 बजे से दोपहर 1:10 बजे तक
नोट करें कि ये समय नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार हैं।
लाभ चतुर्थी पर कैसे करें गणेश जी की पूजा
इस दिन सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें। पूजा घर में भगवान गणेश की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। उन्हें दूर्वा, पीले फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें। इसके बाद मोदक, लड्डू और गुड़-चना का भोग लगाएं।
गणेश जी के मंत्रों का जाप करें और लाभ चतुर्थी की व्रत कथा सुनें। अंत में गणेश जी की आरती करें। अपनी मनोकामना कहते हुए सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।
नवंबर 2026 में दूसरा चतुर्थी व्रत कब है
नवंबर 2026 महीने की दूसरी चतुर्थी 27 नवंबर, शुक्रवार को पड़ेगी। इसे गणाधिप संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है। यह व्रत कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष चतुर्थी के अनुसार आता है। पूर्णिमांत पंचांग में इसे मार्गशीर्ष मास की संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है।
इस दिन भगवान गणेश के गणाधिप स्वरूप की पूजा की जाती है। गणाधिप का अर्थ है गणों के स्वामी। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं। भक्त अपने परिवार की खुशहाली और परेशानियों से मुक्ति के लिए यह व्रत रखते हैं।
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी 2026 की तिथि और मुहूर्त
- तारीख: 27 नवंबर 2026, शुक्रवार
- चतुर्थी तिथि शुरू: 27 नवंबर को सुबह 9:48 बजे
- चतुर्थी तिथि समाप्त: 28 नवंबर को सुबह 6:39 बजे
- चंद्रोदय का समय: रात 8:18 बजे
नई दिल्ली के पंचांग के अनुसार चंद्रोदय रात 8:18 बजे होगा। दूसरे शहरों में चांद निकलने का समय अलग हो सकता है।
गणाधिप संकष्टी चतुर्थी पर कैसे करें पूजा
संकष्टी चतुर्थी पर भक्त सुबह से व्रत रखते हैं। सुबह गणेश जी की पूजा करके व्रत का संकल्प लें। दिनभर अपनी श्रद्धा और सामर्थ्य के अनुसार व्रत रखें। शाम को भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें दूर्वा, फूल, धूप, दीप और मोदक अर्पित करें। गणाधिप संकष्टी व्रत कथा सुनें और गणेश जी की आरती करें।
इस व्रत में चंद्रमा के दर्शन का भी विशेष महत्व है। रात में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें। इसके बाद गणेश जी का स्मरण करके व्रत का पारण करें।
विनायक चतुर्थी और संकष्टी चतुर्थी में क्या अंतर है
- विनायक चतुर्थी: यह शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाई जाती है। इस दिन दोपहर में गणेश जी की पूजा का विशेष महत्व है।
- संकष्टी चतुर्थी: यह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को आती है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त रात में चंद्रमा के दर्शन और अर्घ्य देने के बाद व्रत खोलते हैं।
इस तरह नवंबर 2026 में 13 और 27 तारीख को गणेश जी की पूजा के दो खास अवसर मिलेंगे। भक्त अपनी श्रद्धा के अनुसार दोनों दिन व्रत रख सकते हैं और गणपति बप्पा से सुख, शांति और खुशहाली की प्रार्थना कर सकते हैं।
