Nirjala Ekadashi Vrat Katha: बिना जल के व्रत, लेकिन अनंत फल! पढ़ें निर्जला एकादशी की पावन कथा

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: निर्जला एकादशी, सभी एकादशियों में सबसे श्रेष्ठ और पुण्यदायी मानी जाती है। यह व्रत ज्येष्ठ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को आता है और इस दिन बिना जल ग्रहण किए उपवास रखा जाता है। इसलिए इसे 'निर्जला' एकादशी कहा जाता है। मान्यता है कि इस व्रत का फल सभी 24 एकादशियों के व्रत के बराबर होता है।

Nirjala Ekadashi Vrat Katha: शास्त्रों अनुसार निर्जला एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति को उसके समस्त पापों से मुक्ति मिल जाती है और साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत मुख्य रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो किसी कारणवश वर्षभर की सभी एकादशियों का पालन नहीं कर पाते। केवल इस एक व्रत को करने से उन्हें सभी व्रतों के बराबर फल प्राप्त होता है। इस साल ये एकादशी 6 जून को पड़ी है। यहां आप देखेंगे निर्जला एकादशी की पावन कथा।

निर्जला एकादशी व्रत कथा (Nirjala Ekadashi Vrat Katha)

महाभारत के अनुसार, यह व्रत भीमसेन से जुड़ा हुआ है। पांडवों में भीम को भोजन का बहुत शौक था। जब श्रीव्यास जी ने पांडवों से कहा कि वर्ष भर सभी एकादशियों का व्रत रखना चाहिए, तो भीम ने कहा— "मुझे बहुत भूख लगती है, मैं भोजन के बिना नहीं रह सकता, मैं व्रत नहीं रख पाऊंगा।"

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