Kushmanda Devi Ki Aarti (माता कूष्मांडा की आरती): आज शारदीय नवरात्रि का चौथा दिन है। इस दिन मां दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा-अर्चना की जाती है। मान्यता है कि जो भक्त नवरात्रि के चौथे दिन मां कूष्मांडा की विधि-विधान पूजा करता है उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। कहते हैं कि अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से बीमार चल रहा है तो उन्हें या उनके लिए मां कुष्मांडा की पूजा जरूर करनी चाहिए। क्योंकि मां कूष्मांडा की पूजा से अच्छी सेहत की प्राप्ति होती है। यहां देखें मां कूष्मांडा की आरती।
Maa Kushmanda Ki Aarti
मां कूष्मांडा की आरती (Maa Kushmanda Ki Aarti)
कूष्मांडा जय जग सुखदानी ।
मुझ पर दया करो महारानी ॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली ।
शाकंबरी मां भोली भाली ॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे ॥
भीमा पर्वत पर है डेरा ।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥
सबकी सुनती हो जगदंबे ।
सुख पहुंचती हो मां अंबे ॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा ।
पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥
मां के मन में ममता भारी ।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥
तेरे दर पर किया है डेरा ।
दूर करो माँ संकट मेरा ॥
मेरे कारज पूरे कर दो ।
मेरे तुम भंडारे भर दो ॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए ।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए ॥
मां कूष्मांडा को इस चीज का जरूर लगाएं भोग (Maa Kushmanda Bhog)
मां कूष्मांडा को मालपुआ बेहद प्रिय होता है। ऐसे में नवरात्रि के चौथे दिन की पूजा में मालपुआ का भोग अवश्य लगाएं। इस भोग को लगाने से माता प्रसन्न होती हैं और अपने भक्तों के कष्टों का निवारण कर देती हैं। कुष्मांडा का अर्थ होता है कुमढ़ा जिसे पेठा भी कहते हैं। मां कुष्मांडा की पूजा में कुमढ़े की बलि देने की भी मान्यता है।
