Maa Kushmanda Vrat Katha: नवरात्रि के चौथे दिन जरूर पढ़ें मां कूष्मांडा की व्रत कथा, जानें देवी की महिमा

Maa Kushmanda Vrat Katha: नवरात्रि के चौथे दिन माता दुर्गा के स्वरूप मां कूष्मांडा का पूजन किया जाता है। माता कूष्मांडा के व्रत के दिन उनकी कथा भी पढ़नी या सुननी चाहिए।

Maa Kushmanda Vrat Katha: शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर 2026 से हो गई है। आज नवरात्रि के चौथे दिन मां दुर्गा के स्वरूप मां कूष्मांडा का पूजन किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन मां की पूजा करने से भक्तों को मनचाहा फल मिलता है। मां कूष्मांडा का स्वरूप बेहद अद्भुत है। उनकी आठ भुजाएं हैं, इसलिए उन्हें अष्टभुजा देवी भी कहा जाता है। उनके हाथों में कमंडल, धनुष, बाण, कमल, अमृत कलश, चक्र और गदा सुशोभित हैं। वहीं, उनके आठवें हाथ में सिद्धि और निधि देने वाली जपमाला है। मां का तेज सूर्य के समान माना जाता है और उन्हें ऊर्जा व सकारात्मकता का प्रतीक भी माना जाता है।

Maa Kushmanda Vrat Katha

मां कूष्मांडा की व्रत कथा (फोटो: AI)

नवरात्रि के इस दिन भक्त मां कूष्मांडा की विधि-विधान से पूजा करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। पूजा के दौरान मां को फूल, फल और मिठाई अर्पित की जाती है। इसके साथ ही भक्त व्रत कथा पढ़ते हैं। आइए जानते हैं मां दुर्गा के चौथे स्वरूप मां कूष्मांडा की पौराणिक व्रत कथा।

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