हर दिन पतली हो रही है जोशीमठ के नृसिंह देवता मंदिर की मूर्ति, जानिए क्या कहती है इससे जुड़ी भविष्यवाणी

  • Authored by: शिवम पांडे
  • Updated Jan 7, 2023, 01:01 PM IST

Narsingh Devta Temple at Joshimath: उत्तराखंड का जोशीमठ शहर अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है। जोशीमठ का हिंदू धर्म में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां पर 1200 साल पुराना नृसिंह देव का मंदिर है। वहीं, इस मंदिर से जुड़ी भविष्यवाणी भी काफी चर्चा में है। जानिए नृसिंह देव मंदिर का इतिहास और क्या है इससे जुड़ी भविष्यवाणी।

KEY HIGHLIGHTS
  • उत्तराखंड का जोशीमठ ऐतिहासिक शहर है।
  • जोशीमठ में 1200 साल पुराना नृसिंह देव मंदिर है।
  • नृसिंह मंदिर में भगवान विष्णु के शांत स्वरूप के दर्शन होते हैं।

Narsingh Devta Temple Joshimath Facts: उत्तराखंड का ऐतिहासिक शहर जोशीमठ का अस्तित्व खतरे में है। मकान में दरार पड़ने के कारण सैकड़ों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर हो गए हैं। जोशीमठ हिंदू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भी बेहद महत्वपूर्ण शहर है। इसी जगह पर जगतगुरु शंकराचार्य जी ने तपस्या की थी। वहीं, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जोशीमठ को नरसिंह देवता की स्थली भी कहा जाता है। जोशीमठ में 1200 साल पुराना नृसिंह देव का मंदिर है। यहां पर आदिगुरु शंकराचार्य ने नरसिंह देवता की मूर्ति स्थापित की थी।

Narsingh-Dev-Temple-Joshimath

Nar Singh Dev Temple Uttarakhand

नृसिंह मंदिर में भगवान विष्णु के शांत स्वरूप के दर्शन होते हैं। बद्रीनाथ के कपाट बंद होने के बाद यहां पर भगवान विष्णु की शीतकालीन गद्दी की पूजा की जाती है। पुराणों के अनुसार भगवान श्री नरसिंह जी के दर्शन उपरान्त भी बद्रीनाथ जी के दर्शनों की परम्परा है। बोरान में विराजमान शालीग्राम शिला में नरसिंह जी का अलोगिक विग्रह है। यहां पर नृसिंह देव की मूर्ति की बाई कलाई पतली है और ये हर दिन पतली होती जा रही है। स्थलपुराण के अनुसार जब तक श्री नरसिंह भगवान कला रूप में यहां विराजमान रहेंगे तभी तब बद्रीनाथजी के दर्शन बद्रीनाथ धाम में होंगे, तत्पश्चात् भविष्यनद्री में भगवान श्री बद्रीनाथजी विराजमान होंगे।

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