Mattu Pongal Date 2024: कब मनाया जाएगा मट्टू पोंगल, जानें डेट और महत्व

Mattu Pongal Date 2024: पोंगल पर्व की शुरुआत 15 जनवरी से मकर संक्रांति के दिन से हो गई है। ये पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। पोंगल के तीसरे दिन के पर्व को मट्टू पोंगल के नाम से जाना जाता है। आइए जानते हैं कब है मट्टू पोंगल। डेट, महत्व।

Mattu Pongal Date 2024 (कब है मट्टू पोंगल): साल 2024 में पोंगल पर्व की शुरुआत 15 जनवरी मकर संक्रांति के दिन से हो गई है। मकर संक्रांति का त्योहार हर जगह पर अलग- अलग तरीके से मनाया जाता है। ये त्योहार नई फसल की कटाई के प्रतीक का त्योहार है। जहां उत्तर भारत में इस त्योहार को मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। वहीं दक्षिण भारत में पोंगल के नाम से जाना जाता है। पोंगल दक्षिण भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। पोंगल का पर्व पूरे चार दिनों तक चलता है। हर दिन कुछ ना कुछ अलग- अलग कार्यक्रम किये जाते हैं। पहले दिन के पोंगल को भोगी पोंगल के नाम से जाना जाता है। वहीं दूसरे दिन का पोंगल सूर्य पोंगल तौर पर मनाया जाता है। तीसरे दिन के पोंगल को मट्टू पोंगल के नाम से जानते हैं। वहीं चौथे दिन का पोंगल कन्या पोंगल के नाम से जाना जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं पोंगल कब है और इसके महत्व के बारे में।

Mattu Pongal Date 2024

Mattu Pongal Date 2024 (मट्टू पोंगल डेट 2024)

पोंगल पर्व की शुरुआत 15 जनवरी से हो गई है। इस बार मट्टू पोंगल 17 जनवरी 2024 को बुधवार के दिन मनाया जाएगा। ये पोंगल के तीसरे दिन मनाया जाता है। इस दिन बैल की पूजा विशेष रूप से की जाती है।

मट्टू पोंगल पूजा विधि ( Mattu Pongal Puja Vidhi)

  • मट्टू पोंगल के दिन पशुओं की पूजा की जाती है। इस दिन बैल गाय को नहलाकर सजाया जाता है।
  • उसके बाद बैल के सिंग में तैल लगाकर उनको नये वस्त्र और घंटी पहनाई जाती है।
  • फिर उनकी विधि पूर्वक टीका लगाकर पूजा की जाती है और गले में माला पहनाई जाती है।
  • उसके बाद बैल को भरपेट चावल, गन्ने खाने के लिए दिए जाते हैं।

मट्टू पोंगल महत्व ( Mattu Pongal Importance)

पोंगल के तीसरे दिन को मट्टू पोंगल के नाम से जाना जाता है। इस दिन खासतौर पर बैलों की पूजा की जाती है। इस पशुओं की पूजा कर उनको सम्मान दिया जाता है। इस बैलों को सजाकर मोतियों की घंटी पहनाई जाती है। इस दिन बैलों की दौड़ का आयोजन किया जाता है। जिसमें बैलों के बीच दौड़ की जाती है। इसे जलीकट्टू के नाम से जाना जाता है।

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