Mangal Ki Mahadasha: कुंडली में कुछ-कुछ समय के लिए हर ग्रह की महादशा आती है। जिसका हमारी लाइफ पर गहरा असर पड़ता है। इन्हें विमशोत्तरी दशा बोला जाता है। इन विमशोत्तरी दशाओं में मंगल की महादशा पूरे 7 साल चलती है। यह समय किसी के लिए जीवन का सबसे सुनहरा दौर बन जाता है तो किसी के लिए संघर्ष और तनाव का कारण भी बन सकता है।
मंगल साहस, जमीन-जायदाद, भाई, नेतृत्व, सेना-पुलिस और क्रोध के कारक हैं। इनकी महादशा में परिणाम आपकी लग्न और चंद्र राशि के साथ-साथ मंगल की कुंडली में स्थिति पर निर्भर करते हैं।
क्या होती है मंगल की महादशा?
जब हमारा जन्म होता है तो तब से किसी न किसी ग्रह की दशा की शुरुआत हो जाती है और पूरी जिंदगी लगभग 120 साल अलग-अलग ग्रहों की महादशा आती रहती हैं। अगर कोई व्यक्ति 120 साल से ऊपर जीवित रहता है तो इसके बाद शुरू से उसी ग्रह की दशा आ जाती है, जो उसके जन्म के समय थी। हमारी जिंदगी में ग्रहों की दशाएं तय करती हैं कि आने वाले साल हमारे लिए अच्छे होंगे या मुश्किल होंगे।
बात करें मंगल की महादशा की तो यह कुल 7 साल की होती है और यह चंद्रमा की महादशा के बाद आती है। इन दशाओं में अन्य ग्रहों की अंतर्दशा और प्रतिअंतर्दशा आती है। अगर आपकी कुंडली में मंगल अच्छी स्थिति में हैं तो ये 7 साल आपको बहुत ताकत, पैसा, जमीन-मकान, गाड़ी, प्रमोशन, नाम-यश देंगे। अगर मंगल कमजोर या खराब स्थिति में हैं तो क्रोध, झगड़े, दुर्घटना, कोर्ट-कचहरी, चोट, ऑपरेशन जैसी परेशानियां आ सकती हैं।
मंगल के मुख्य क्षेत्र
मंगल बेसिकली साहस, हिम्मत, आत्मविश्वास,भाई-बहन, जमीन, मकान, प्रॉपर्टी, पुलिस, सेना, सर्जन, इंजीनियर, जिम, खेल, क्रोध, दुश्मन, कोर्ट-कचहरी, सर्जरी का कारक होता है और इन्हीं क्षेत्रों में फल भी देता है।
कुंडली में मंगल की महादशा कैसे तय होती है?
हम विमशोत्तरी दशा प्रणाली का इस्तेमाल करते हैं। इसके लिए जन्म के समय चंद्रमा जिस नक्षत्र में होता है, उसी नक्षत्र के स्वामी ग्रह की महादशा पहले चलती है। हर ग्रह की एक निश्चित अवधि होती है।
- ग्रह- महादशा की अवधि
- सूर्य-6 साल
- चंद्रमा-10 साल
- मंगल-7 साल
- राहु-18 साल
- गुरु-16 साल
- शनि-19 साल
- बुध-17 साल
- केतु-7 साल
- शुक्र-20 साल
- कुल-120 साल (इंसान की औसत आयु के बराबर)
उदाहरण से समझिए
मान लीजिए किसी का जन्म अश्विनी नक्षत्र में हुआ है तो अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु है। ऐसे में व्यक्ति की लाइफ में पहले केतु की 7 साल की महादशा चलेगी। केतु के बाद शुक्र की 20 साल की महादशा शुरू होगी। वहीं, अगर जन्म मृगशिरा नक्षत्र में हुआ तो मृगशिरा के स्वामी मंगल हैं। ऐसे में जन्म के समय से ही मंगल की 7 साल की महादशा चल रही होगी। यानी 0 से 7 साल तक मंगल की महादशा होगी।
आप कैसे पता करेंगे कि आपकी मंगल की महादशा कब चलेगी?
अपनी जन्म कुंडली निकलवाएं जो ऑनलाइन भी बन जाती है। देखें कि जन्म के समय चंद्रमा किस नक्षत्र में थे। उस नक्षत्र के स्वामी से दशा क्रम शुरू होता है। मंगल की बारी जब आएगी, तभी मंगल की महादशा शुरू होगी। आइए जानते हैं कि किन राशियों के लिए यह दशा सबसे शुभ और राजयोग देने वाली होती है।
मेष राशि
मंगल आपकी लग्न के स्वामी हैं और अपनी ही राशि में बलवान होते हैं। इन सात सालों में आपका आत्मविश्वास आसमान छुएगा, नई जमीन-मकान-गाड़ी का सुख मिलेगा, नौकरी-व्यापार में तेज तरक्की होगी, भाई-बहनों से भरपूर लाभ और सहयोग रहेगा। पुलिस, सेना, खेल, इंजीनियरिंग, सर्जरी या प्रॉपर्टी के क्षेत्र में बड़ी सफलता मिलेगी। लोग आपका सम्मान भी करेंगे और आपसे डरेंगे भी। कुल मिलाकर यह समय आपके जीवन का सबसे ताकतवर और कामयाब दौर होगा।
कर्क राशि
मंगल यहां भी योगकारक हैं। इन सात सालों में मकान-गाड़ी का सुख, माता से लाभ और सहयोग, परिवार में बढ़ोतरी, नौकरी में स्थायित्व और प्रमोशन मिलेगा। प्रॉपर्टी के काम बनेंगे, पुराने कर्ज उतर जाएंगे। परिवार के साथ सुख-शांति रहेगी।
सिंह राशि
मंगल आपके लिए योगकारक ग्रह हैं। इन सात सालों में सरकारी नौकरी, प्रशासनिक पद, पिता से बड़ा लाभ, जमीन-जायदाद में बढ़ोतरी होगी। आपका आत्मविश्वास और रुतबा बढ़ेगा, लोग आपकी बात मानेंगे। पुलिस, सेना, मैनेजमेंट या लीडरशिप के क्षेत्र में बहुत ऊंचा मुकाम हासिल करेंगे।
वृश्चिक राशि
मंगल आपकी राशि के भी स्वामी हैं, इसलिए यह महादशा आपके लिए भी राजयोग जैसी रहती है। इन सात सालों में धन-संपत्ति में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी, दुश्मन अपने आप शांत हो जाएंगे, कोर्ट-कचहरी के पुराने मामले आपके पक्ष में खत्म होंगे। नेतृत्व क्षमता बढ़ेगी, लोग आपकी बात मानेंगे, अचानक बड़ा धन लाभ या विरासत मिलने के योग बनेंगे। आप जहां जाएंगे वहां अपना प्रभाव छोड़ेंगे।
धनु राशि
मंगल यहां मित्र ग्रह हैं। महादशा में भाग्योदय होगा, लंबी यात्राएं सफल रहेंगी, धार्मिक कार्यों में मन लगेगा, गुरु या बड़े लोगों का साथ मिलेगा। व्यापार-नौकरी में स्थिरता और बढ़ोतरी होगी, कोई बड़ा काम जो सालों से अटका था वह पूरा हो जाएगा।
मकर राशि
मंगल यहां उच्च के हो जाते हैं, इसलिए यह दशा करियर के लिए सबसे शानदार रहती है। प्रमोशन पर प्रमोशन, बड़ी जिम्मेदारी, सरकारी काम बनना, नाम-यश और पैसा तीनों बढ़ेंगे। व्यापारियों को बड़ा विस्तार, नई फैक्ट्री या ऑफिस खोलने का सुख मिलेगा। समाज में आपका रुतबा बढ़ेगा, लोग आपको ‘सर’ या ‘नेता जी’ कहकर बुलाएंगे।
कुंभ राशि
मंगल यहां भी उच्च के माने जाते हैं। महादशा में धन की बरसात होगी, नई गाड़ी, नया मकान, राजनीति या सामाजिक कार्यों में सफलता मिलेगी। व्यापार में नए पार्टनर या बड़े ऑर्डर आएंगे। आपकी हिम्मत और साहस देखकर लोग हैरान रह जाएंगे। यह समय आपके जीवन की सबसे बड़ी छलांग का समय होगा।
मध्यम से अच्छे परिणाम पाने वाली राशियां
मीन और तुला राशि वालों को पहले थोड़ा संघर्ष फिर अच्छे परिणाम मिलते हैं।
इनके लिए मंगल की महादशा रहती है कष्टकारी
कन्या, मिथुन, वृषभ और कभी-कभी तुला-कर्क वालों को क्रोध, दुर्घटना, कोर्ट-कचहरी, भाई से अनबन और सेहत की दिक्कतें आ सकती हैं।
मंगल महादशा के सामान्य शुभ परिणाम
मंगल की महादशा में आपको नई जमीन मिल सकती है। मकान, गाड़ी, दुकान भी मिलने की पूरी संभावना होती है। इस दौरान भाई-बहनों से आपको लाभ मिलता है और साहस बढ़ जाता है। दुश्मनों पर आप विजय प्राप्त करते हैं। कोर्ट केस में जीत के योग बनते हैं। पुलिस, सेना,सर्जरी और स्पोर्ट्स के क्षेत्र में सफलता मिलती है।
अगर मंगल कमजोर या अशुभ हों तो बचाव के उपाय
अगर मंगल कुंडली में कमजोर है या अशुभ फल देता है तो मंगलवार को हनुमान चालीसा पढ़ें, लाल मसूर की दाल दान करें, गुड़-चने का प्रसाद बांटें और मंगलवार व्रत रखें। प्रतिदिन ‘ॐ अं अंगारकाय नमः’ रोज 108 बार जपें, ज्योतिषी से पूछकर 5-7 रत्ती का मूंगा तांबे की अंगूठी में पहनें। मंगल की महादशा मेष, वृश्चिक, मकर, कुंभ, सिंह, धनु और कर्क वालों के लिए ज्यादातर राजयोग जैसी होती है। आपकी कुंडली में मंगल कहां बैठे हैं, इससे भी फैसला होता है, क्योंकि अशुभ भावों में मंगल शुभ फल नहीं दे पाते हैं।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
