Makar Sankranti Kites Importance (मकर संक्रांति पर पतंगों का महत्व): सर्द हवाओं के बीच और सूर्य की सुनहरी किरणों के साथ जोश और उत्साह में मनाया जाने वाले मकर संक्रांति का पर्व, एक ऐसा त्योहार है जिसका सभी को बेसब्री से इंतजार रहता है। इस प्राचीन उत्सव में तिल और गुड़ से बने हुए लड्डू और खिचड़ी खाने और दान करने की विशेष परंपरा है। लेकिन इन सब में से सबसे लोकप्रिय है आसमान में रंग-बिरंगी पतंग उड़ाने की परंपरा। हवाओं के रुख से पतंगे नभ मंडल को रोशन कर देती हैं और भारत में कई जगह इस दिन पतंगबाजी की प्रतियोगिता भी होती है। लेकिन क्या आपने सोचा है कि भारतीय पृष्ठभूमि में मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने की परंपरा किसने कब और कैसे शुरू की ? किसने पहली पतंग उड़ाई थी और पतंगों की क्या महत्ता है, आज हम इसी तथ्य के बारे में आपको बताएंगे।
मकर संक्रांति पर पतंगों का महत्व
Makar Sankranti Kites Importance (मकर संक्रांति पर पतंगों का महत्व)
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ने का असल महत्व ये है कि ठंड के कड़कते मौसम में जब शरीर को धूप लगती है तो शरीर ऊर्जावान होता है और शरीर बिमारियों से दूर रहता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और सर्दी के मौसम में सूर्य की किरणें सीधे धरती पर आती हैं। ऐसे में जोश और उत्साह के साथ पतंग उड़ाने से शरीर को धूप लगने से विटामिन डी भरपूर मिलती है। पतंगों से जुड़ी हुई एक और मान्यता है कि पतंगें देवताओं के लिए धन्यवाद के प्रतीक के रूप में काम करती हैं क्योंकि वे ऊपर स्वर्ग में प्रवेश कर सकती हैं।
किसने उड़ाई थी पहली पतंग ?
मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने कई प्रचलित लोक कथाएं हैं लेकिन इनमें से सबसे प्रख्यात रामायण काल की है जिसमें ये कहा जाता है कि पतंग उड़ाने की शुरुआत भगवान राम ने की थी। मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने मकर संक्रांति के दिन पहली पतंग उड़ाई थी और ऐसा कहा जाता है कि ये पतंग उड़ते-उड़ते इंद्रलोक चली गई थी। भगवान राम द्वारा शुरू की गई इस परंपरा को लोग आज भी सदियों बाद निभाते चले आ रहे हैं।
