Mahabharat Ki Ansuni Kahaniyan: महाभारत से जुड़े कई ऐसे किस्से-कहानियां हैं जिनके बारे में आज भी लोग नहीं जानते। लेकिन ये किस्से जीवन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण शिक्षाएं देते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको महाभारत की एक ऐसी दिलचस्प कहानी के बारे में बताएंगे जो भगवान श्री कृष्ण और उनकी बुआ के बेटे से जुड़ी है। कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने अपनी बुआ को ये वचन दिया था कि वो उनके पुत्र की 100 गलतियों को माफ कर देंगे। लेकिन भगवान ने ऐसा क्यों किया था? चलिए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
Mahabharat Ki Ansuni Kahaniyan: शिशुपाल के वध की कथा
श्री कृष्ण की बुआ का पुत्र था शिशुपाल
महाभारत की ये कथा श्रीकृष्ण और शिशुपाल से जुड़ी है। शिशुपाल भगवान श्रीकृष्ण की बुआ का पुत्र था जो चेदी राज्य का राजा था। जो रिश्ते में कौरवों और पांडवों का भाई लगता था। शिशुपाल श्री कृष्ण के पिता वासुदेव की बहन का पुत्र था। इस तरह से भगवान का वह भाई लगता था। लेकिन श्री कृष्ण का इतना करीबी होने के बाद भी भगवान ने उसका वध क्यों किया इस बारे में जानने के लिए उसके जन्म की कहानी को जानना पड़ेगा।
इसलिए श्री कृष्ण के हाथ होना था शिशुपाल का वध
शिशुपाल का जब जन्म हुआ तो वह दिखने में बड़ा विचित्र था। उसकी तीन आंख और चार हाथ थे। उसके इस रूप को देखकर उसके माता-पिता को बहुत चिंता हुआ। तब उसके माता-पिता ने उसे त्यागने का सोचा। लेकिन तभी आकाशवाणी हुई कि इस बच्चे का त्याग न करें क्योंकि एक समय ऐसा आएगा जब इस बच्चे की अतिरिक्त आंख और हाथ अपने आप गायब हो जाएंगे। लेकिन साथ में एक ओर भी आकाशवाणी हुई जिसमें कहा गया कि जिस व्यक्ति की गोद में बैठने के बाद इस बच्चे की आंख और हाथ गायब होंगे उसी के हाथ इसकी मृत्यु भी होगी।
श्रीकृष्ण ने बुआ को दिया ये वचन
एक दिन जब भगवान श्रीकृष्ण अपनी बुआ के घर आए तो वहां शिशुपाल खेल रहा था। तब श्रीकृष्ण ने उसे गोद में उठा लिया और गोद में उठाते ही उसकी अतिरिक्त आंख और हाथ गायब हो गए। यह देख शिशुपाल के माता-पिता को उसके जन्म के समय की आकाशवाणी याद आ गई और वे अपने पुत्र को लेकर डर गए। इस बारे में शिशुपाल की माता ने कृष्ण जी से बात की। भगवान अपनी बुआ को दुखी नहीं करना चाहते थे लेकिन वे विधि के विधान को भी नहीं टाल सकते थे। इसलिए उन्होंने अपनी बुआ को वचन दिया कि वे शिशुपाल की 100 गलतियों को माफ कर देंगे लेकिन 101 वीं गलती पर उसे नहीं छोड़ेंगे।
रुक्मिणी से विवाह करना चाहता था शिशुपाल
शिशुपाल जब बड़ा हुआ तो उसने रुक्मिणी से विवाह करने की सोची। लेकिन रुक्मिणी भगवान श्रीकृष्ण से प्रेम करती थीं। लेकिन रुक्मणी के भाई को श्रीकृष्ण पसंद नहीं थे। लेकिन भगवान श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी को भगाकर विवाह कर लिया। जिससे शिशुपाल भगवान श्रीकृष्ण को अपना शत्रु मानने लगा था। इसी शत्रुता के कारण जब युधिष्ठिर को युवराज घोषित किया गया और राजसूय यज्ञ का आयोजन किया गया। तब सभी प्रतापी राजाओं को भी बुलाया गया। इस दौरान श्रीकृष्ण और शिशुपाल को भी आमंत्रित किए गया था।
100 गलतियों के बाद किया वध
मौके का फायदा उठाते ही शिशुपाल श्री कृष्ण का अपमान करने लगा। लेकिन भगवान शांत रहकर आयोजन को देखने लगे लेकिन शिशुपाल तब भी नहीं माना और वे लगातार अपमान करता रहा। श्रीकृष्ण वचन से बंधे थे इसलिए वे शिशुपाल की गलतियों को सहन करते रहे थे। लेकिन जैसे ही शिशुपाल ने सौ अपशब्द पूर्ण करके 101 वां अपशब्द कहा वैसे ही श्रीकृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल की गर्दन धड़ से अलग कर दी। इस तरह से शिशुपाल मारा गया।
इस कहानी से हमें क्या सीख मिलती है: शिशुपाल वध की घटना ये सीख देती है कि अहंकार और अपमानजनक व्यवहार के परिणाम बेहद गंभीर होते हैं। श्रीकृष्ण ने अपनी बुआ के पुत्र शिशुपाल की 100 गलतियों को माफ किया, लेकिन 101वीं गलती पर उसे दंडित करते हुए उसका वध कर दिया। जिससे पता चलता है कि सहनशीलता की भी एक सीमा होती है और अधर्मी को दंडित करना आवश्यक होता है।
