Mata Saraswati mantra And Shlok (माता सरस्वती मंत्र और श्लोक): हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष बसंत पंचमी का पर्व माघ माह की शुक्ल पक्ष की तिथि पर मनाया जाता है। इस त्योहार में मुख्य रूप से माता सरस्वती का पूजन होता है। मान्यताओं के अनुसार इस तिथि पर कई शुभ और धार्मिक कार्य जैसे कि शादी-विवाह, मुंडन, बच्चों का नामकरण और गृह प्रवेश बिना मुहूर्त देखे किए जा सकते हैं। कहते हैं इस दिन किए बिना किसी रूकावट के पूर्ण हो जाते हैं। बसंत पंचमी का दिन माता सरस्वती की कृपा पाने के लिए खास माना जाता है। ऐसे में आप इस दिन कुछ विशेष मंत्रों और श्लोकों का जाप जरूर करें।
Maa Saraswati Mantra And Shlok In Sanskrit
Mata Saraswati mantra (माता सरस्वती मंत्र)
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं वाग्देव्यै सरस्वत्यै नमः॥
सरस्वती नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणी,
विद्यारम्भं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु में सदा।
सरस्वती गायत्री मंत्र - ॐ ऐं वाग्देव्यै विद्महे कामराजाय धीमहि। तन्नो देवी प्रचोदयात्॥
ॐ अर्हं मुख कमल वासिनी पापात्म क्षयम्कारी
वद वद वाग्वादिनी सरस्वती ऐं ह्रीं नमः स्वाहा॥
मां सरस्वती वदंना (Saraswati Vandana in Sanskrit)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा माम् पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥
शुक्लाम् ब्रह्मविचार सार परमाम् आद्यां जगद्व्यापिनीम्।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकाम् विदधतीम् पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे ताम् परमेश्वरीम् भगवतीम् बुद्धिप्रदाम् शारदाम्॥2॥
मां सरस्वती श्लोक (Maa Saraswati Shlok)
सरस्वतीं च तां नौमि वागधिष्ठातृदेवताम् ।
देवत्वं प्रतिपद्यन्ते यदनुग्रहतो जना:
ओउम या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता ,
या वीणावरदण्डमण्डित करा या श्वेत पद्मासना ।
या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता ,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा।।
सरस्वति नमस्तुभ्यं वरदे कामरूपिणि ।
विद्यारंभं करिष्यामि सिद्धिर्भवतु मे सदा ॥
नास्ति विद्यासमं चक्षुः नास्ति सत्यसमं तपः।
नास्ति रागसमं दुःखं नास्ति त्यागसमं सुखम्॥
Saraswati Puja Importance (सरस्वती पूजा का महत्व)
ज्ञान, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती की पूजा का प्राचीन और धार्मिक महत्व है। इस दिन भक्त शिक्षा में सफलता, रचनात्मकता और आध्यात्मिक विकास के लिए माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। ये शुभ त्यौहार वसंत के आगमन का भी प्रतीक है। माता सरस्वती की पूजा करने से व्यक्ति को शिक्षा, साहित्य और कला के क्षेत्र में उन्नति मिलती है।
