Maa Durga Ki Aarti Hindi Lyrics: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी.. पढ़ें मां दुर्गा की विशेष आरती

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jun 4, 2023, 05:49 PM IST

Maa Durga Ki Aarti Lyrics in Hindi (जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी मां दुर्गा की आरती): हिंदू धर्म में मां दुर्गा को आदिशक्ति, भगवती, जगत जननी जग्दम्बा, माता रानी आदि कई नामों से जाना जाता है। मान्यता है कि मातारानी की विधि अनुसार अराधना करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। यहां पढ़ें ॐ जय अम्बे गौरी आरती इन हिंदी।

Maa Durga Ki Aarti Lyrics In Hindi, Jay Ambey Gauri Maiya Jai Shyama Gauri Aarti in Hindi: आदिशक्ति देवी दुर्गा हिन्दुओं की प्रमुख देवी हैं। शास्त्रों के अनुसार, मातारानी अपने भक्तों को रक्षा प्रदान करने वाली, मोक्ष प्रदायनी, ममतामई और कल्याणकारी देवी मानी जाती हैं। मां जगदंबे की विधिपूर्वत पूजा के बाद आरती करने से विशेष फलों की प्राप्ति होती है। कहते हैं प्रतिदिन सुबह-शाम मां अम्बे की आरती करने से व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। जीवन में किसी भी चीज की कमी नहीं रहती। घर-परिवार में खुशहाली आती है और जीवन सभी सुखों से परिपूर्ण हो जाता है। यहां पढ़ें जय अम्बे गौरी आरती लिरिक्स इन हिंदी।

Maa Durga Ki Aarti Lyrics

Maa Durga Aarti Lyrics In Hindi: जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी के हिंदी लिरिक्स

दुर्गा मां की विशेष आरती (Jay Ambey Gauri Aarti Lyrics In Hindi)

जय अम्बे गौरी,

मैया जय श्यामा गौरी ।

तुमको निशदिन ध्यावत,

हरि ब्रह्मा शिवरी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

मांग सिंदूर विराजत,

टीको मृगमद को ।

उज्ज्वल से दोउ नैना,

चंद्रवदन नीको ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कनक समान कलेवर,

रक्ताम्बर राजै ।

रक्तपुष्प गल माला,

कंठन पर साजै ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

केहरि वाहन राजत,

खड्ग खप्पर धारी ।

सुर-नर-मुनिजन सेवत,

तिनके दुखहारी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

कानन कुण्डल शोभित,

नासाग्रे मोती ।

कोटिक चंद्र दिवाकर,

सम राजत ज्योती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

शुंभ-निशुंभ बिदारे,

महिषासुर घाती ।

धूम्र विलोचन नैना,

निशदिन मदमाती ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चण्ड-मुण्ड संहारे,

शोणित बीज हरे ।

मधु-कैटभ दोउ मारे,

सुर भयहीन करे ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

ब्रह्माणी, रूद्राणी,

तुम कमला रानी ।

आगम निगम बखानी,

तुम शिव पटरानी ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

चौंसठ योगिनी मंगल गावत,

नृत्य करत भैरों ।

बाजत ताल मृदंगा,

अरू बाजत डमरू ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

तुम ही जग की माता,

तुम ही हो भरता,

भक्तन की दुख हरता ।

सुख संपति करता ॥

ॐ जय अम्बे गौरी..॥

भुजा चार अति शोभित,

वर मुद्रा धारी । [खड्ग खप्पर धारी]

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