Datta Purnima: दत्त पूर्णिमा की तारीख ही नहीं जानिए पूरी पूजन विधि , इसलिए है बेहद खास

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  • Updated Nov 29, 2022, 10:52 PM IST

Datta Purnima: हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को दत्त जयंती, देव दत्तात्रेय के अवतरण के रूप मे बड़ी धूम-धाम से मनायी जाती है। भगवान दत्तात्रेय एक समधर्मी देवता है और उन्हें त्रिमूर्ति अथार्त ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश का अवतार माना जाता है। इस बार 7 दिसंबर को दत्त जयंती पड़ रही है।

KEY HIGHLIGHTS
  • ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश के अवतार हैं भगवान दत्तात्रेय
  • देवी अनसूया की कोख से हुआ था भगवान दत्तात्रेय का जन्‍म
  • इस बार 7 दिसंबर को मनाया जाएगा दत्‍त जयंती

Datta Purnima: हिन्‍दू धर्म में भगवान दत्तात्रेय को भगवान विष्णु के 24 अवतारों में से एक माना जाता है। मान्‍यता है कि, भगवान दत्‍तात्रेय एक ऐसे ऋषि हैं जिन्होंने बिना गुरु के ज्ञान प्राप्त किया। भगवान दत्तात्रेय की पूजा महाराष्ट्र, गोवा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और गुजरात और मध्य प्रदेश में किया जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को दत्त जयंती बड़ी ही धूम-धाम से मनायी जाती है। इसबार दत्त जयंती 7 दिसंबर को पड़ रहा है। दत्तात्रेय को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का अवतार माना जाता है। तीन सिर और छह भुजाओं वाले भगवान दत्तात्रेय का जन्म ऋषि अत्रि और उनकी पत्नी देवी अनसूया से हुआ था। आइए जानते हैं पूजा का महत्व, पूजा विधि और कथा।

Datta Purnima 2022

दत्त पूर्णिमा की तारीख नहीं जानिए पूरी पूजन विधि

दत्त पूर्णिमा का महत्व

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