Sita Navami 2023 Vrat Katha: सीता नवमी पर पढ़ें ये प्रचलित व्रत कथा, जानिए कैसे पापिनी को मिली थी पापों से मुक्ति

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Apr 29, 2023, 06:28 AM IST

Sita Navami Vrat Katha In Hindi 2023 (सीता नवमी 2023 की पौराणिक कथा): सीता माता के जन्म दिवस को सीता माता के तौर पर बड़े धूम धाम से मनाया जाता है। लेकिन क्या आपको पता है इस व्रत का महत्व क्या है, इसे करने के क्या फायदे हैं? यहां जानिए सीता नवमी से जुड़ी पौराणिक कथा और इसके महत्व।

Sita Navami Vrat Katha In Hindi 2023 (सीता नवमी 2023 की पौराणिक कथा): सीता नवमी के दिन जनकनंदिनी माता सीता का जन्म हुआ था। इसलिए इस दिन यानी हर साल वैशाख शुक्ल नवमी को देशभर में सीता नवमी हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। यह पावन पर्व साल 2023 में 29 अप्रैल, दिन शनिवार को है। सीता नवमी का हिंदू धर्म में खास महत्व है। इस दिन माता जानकी की पूजा करना फलदाई माना गया है। कहते हैं सीता नवमी के दिन सीता माता की विधिवत पूजा करने से समस्त पाप और कुकर्मों से मुक्ति मिलती है। वहीं, सुहागिनों को अखंड सौभाग्यवती का आशीर्वाद मिलता है। आइए सीता नवमी जैसे पवन पर्व के महत्व को विस्तार से समझते हैं। यहां पढ़ें सीता नवमी से जुड़ी पौराणिक कथा हिंदी में।

सीता नवमी 2023 व्रत कथा

Sita Navami 2023 Vrat: व्रत कथा से जानें क्यों मनाई जाती है सीता नवमी?

सीता नवमी से जुड़ी पौराणिक कथा (Sita Navami 2023 Vrat Katha In Hindi):

पौराणिक कथा के अनुसार, मारवाड़ क्षेत्र में एक देवदत्त नमक ब्राह्मण रहता था, जो वेदवादी श्रेष्ठ था। ब्राह्मण की बड़ी सुंदर एक पत्नी थी, जिसका नाम शोभना था। एक बार ब्राह्मण देवता अपनी जीविका के लिए अपने ग्राम से दूर अन्य ग्राम में भिक्षाटन के लिए गए हुए थे। इधर कुसंगत में फंसकर ब्राह्मणी व्यभिचार में प्रवृत्त हो गई। इसके कारण पूरे गांव में उसकी चर्चाएं होने लगीं। ऐसा देख दुष्ट ब्राह्मणी ने गांव ही जलवा दिया। जब वो दुर्बुद्धि मरी तो उसका अगला जन्म चांडाल के घर हुआ। पति का त्याग करने के कारण अगले जनम में वह चांडालिनी बनी। ग्राम जलाने के कारण उसे भीषण कुष्ठ हो गया और व्यभिचार-कर्म करने के वजह से वह अंधी भी हो गई। इस तरह उस दुष्टा अपने कुकर्म का फल भोगना पड़ा।

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