साल में 3 दिन के लिए लाल क्यों हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी? जानें असम के कामाख्या मंदिर की अनोखी कहानी

Kamakhya Mandir: असम के गुवाहाटी में मौजूद कामाख्या मंदिर से जुड़ी एक अनोखी कहानी सामने आती है। यहां हर साल 3 दिन के लिए ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। आइए जानते हैं क्या है इसकी कथा।

Kamakhya Mandir: नॉर्थ ईस्ट इंडिया के हृदय में बसे कामाख्या मंदिर की पहचान सिर्फ एक धार्मिक स्थल के रूप में नहीं, बल्कि स्त्री शक्ति, सृजन और प्रकृति के अद्भुत संगम के रूप में होती है। गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर सदियों से श्रद्धा, रहस्य और परंपरा का केंद्र रहा है। यहां पहुंचते ही भक्तों को ऐसा महसूस होता है मानो आस्था और ऊर्जा का कोई अदृश्य संसार उन्हें अपनी ओर खींच रहा हो। इस मंदिर से जुड़ी एक अनोखी कहानी लोगों को सुनने के लिए मिलती है। जी हां हर साल यहां लगने वाले अंबुबाची मेले के दौरान यहां बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल हो जाता है। आइए जानते हैं इससे जुड़ी क्या है कहानी?

Kamakhya Mandir

कामाख्या मंदिर से जुड़ी कहानी

क्यों लाल हो जाता है ब्रह्मपुत्र नदी का पानी?

कामाख्या मंदिर के पास लगने वाले अंबुबाची मेले के दौरान एक रहस्यमयी मान्यता लोगों को आकर्षित करती है। कहा जाता है कि इन दिनों ब्रह्मपुत्र नदी (Brahmaputra River) का जल हल्का लाल दिखाई देता है। श्रद्धालु इसे देवी के रजस्वला होने का संकेत मानते हैं। यह परंपरा कामाख्या मंदिर को बाकी शक्तिपीठों से अलग पहचान देती है और इसे रहस्य व आस्था का केंद्र बनाती है। मान्यता है कि इस मेले के दौरान 3 दिनों के लिए ब्रह्मपुत्र नदी के जल में हल्की लालिमा दिखाई देने लगती है। जिसे लोग माता के रजस्वला होने का प्रतीक मानते हैं। इस दौरान 3 दिन तक मां कामाख्या के मंदिर में पुरुषों का प्रवेश वर्जित कर दिया जाता है। हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से इसके अलग-अलग कारण बताए जाते हैं, लेकिन भक्तों के लिए यह देवी की दिव्य उपस्थिति का प्रतीक है।

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