Jyeshtha Purnima Vrat Katha: जेठ पूर्णिमा के दिन जरूर पढ़ें ये व्रत कथा, हर मनोकामना होगी पूर्ण

Jyeshtha Purnima Vrat Katha: ज्येष्ठ पूर्णिमा बेहद खास मानी जाती है। मान्यताओं अनुसार इस शुभ दिन पर ही सावित्री ने अपने पति सत्यवान के प्राण वापस पाए थे। चलिए जानते हैं जेठ पूर्णिमा की कथा क्या है।

Jeth (Jyeshtha) Purnima Vrat Katha In Hindi: वैसे तो साल में कुल 12 या 13 पूर्णिमा आती हैं लेकिन ज्येष्ठ पूर्णिमा का अपना विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं अनुसार जो भक्त इस दिन गंगा नदी में स्नान कर दान-पुण्य के कार्य करता है उसकी समस्त मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं। इतना ही नहीं पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए भी ये पूर्णिमा खास मानी जाती है। इस साल ज्येष्ठ पूर्णिमा 10 जून को मनाई जा रही है। यहां आप जानेंगे ज्येष्ठ पूर्णिमा की व्रत कथा।

ज्येष्ठ पूर्णिमा व्रत कथा

जेठ पूर्णिमा व्रत कथा (Jeth Purnima Vrat Katha In Hindi)

जेठ पूर्णिमा की कथा अनुसार प्राचीन काल में राजा अश्वपति के घर कई सालों बाद एक पुत्री ने जन्म लिया। जिसका नाम सावित्री रखा गया। जब सावित्री बड़ी हो गईं तो उनके पिता यानी राजा अश्वपति ने उनके लिए वर ढूंढना शुरू कर दिया, लेकिन उन्हें अपनी बेटी के योग्य कोई वर समझ नहीं आया।तब सावित्री अपने पिता की परेशानी दूर करने के लिए खुद ही वर की तलाश में निकल गईं। फिर एक दिन उनकी नजर सत्यवान पर पड़ी और उन्होंने सत्यवान को मन ही मन अपना वर चुन लिया।

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