Meera Bai Krishna Bhajan Lyrics: जन्माष्टमी के अवसर पर कृष्ण भक्तों के द्वारा भगवान कृष्ण के मधुर भजन गाए और सुनें जाते हैं। भक्तिकाल की मीरा बाई के कृष्ण भजन आज के समय में भी काफी प्रचलित हैं। आज के दौर में भी उनके भजनों को गाया और सुना जाता है। मीरा ने कृष्ण की भक्ति में लीन होकर बहुत सारे पदों और कृष्ण लीलाओं को अपने भजनों में पिरोया। इसके साथ मीरा के भजन में कृष्ण के प्रति अगाध प्रेम के स्वर भी सुनाई देते हैं। जन्माष्टमी के मौके पर यदि आप भी कृष्ण के भजन गाना या सुनना चाहते हैं तो मीरा भाई के इन भजनों को सुन सकते हैं। मीरा के इन भजनों को सुनने और गाने से आपका मन प्रसन्न हो जाएगा। यहां देखें मीरा बाई के भजन लिरिक्स।
Meera Bai Krishna Bhajan List (मीरा बाई कृष्ण भजन लिस्ट)
- आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको लिरिक्स
- सांवरा म्हारी प्रीत निभाज्यो जी लिरिक्स
- ऐसी लागी लगन मीरा हो गई मगन लिरिक्स
- काहे तेरी अखियों में पानी लिरिक्स
- हे री मैं प्रेम दिवानी मेरा दर्द ना जाने कोई लिरिक्स
Meera Bai Krishna Bhajan Lyrics (मीरा बाई भजन लिरिक्स)
आली री मोहे लागे वृन्दावन नीको लिरिक्स
लागे वृन्दावन नीको,आली मोहे लागे वृन्दावन नीको।
लागे वृन्दावन नीको,
आली मोहे लागे वृन्दावन नीको।
घर घर तुलसी ठाकुर सेवा,
दर्शन गोविन्द जी को,
आली मन लागे वृन्दावन नीको।
निर्मल नीर बहे जमुना को,
भोजन दूध दही को,
आली मन लागे वृन्दावन नीको।
रतन सिंघासन आप विराजे,
मुकुट धरो तुलसी को,
आली मन लागे वृन्दावन नीको।
कुंजन कुंजन फिरत राधिका,
शबद सुनत मुरली को,
आली मन लागे वृन्दावन नीको।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर,
भजन बिना नरभी को,
आली मन लागे वृन्दावन नीको।
ऐ री मैं तो प्रेम दिवानी
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,मेरो दर्द न जाणै कोय ।
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
घायल की गति घायल जाणै,
जो कोई घायल होय ।
जौहरि की गति जौहरी जाणै,
की जिन जौहर होय ॥
सूली ऊपर सेज हमारी,
सोवण किस बिध होय ।
गगन मंडल पर सेज पिया की,
किस बिध मिलणा होय ॥
दर्द की मारी बन-बन डोलूं,
वैद्य मिल्या नहिं कोय ।
मीरा की प्रभु पीर मिटेगी,
जद वैद्य सांवरिया होय ॥
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
ऐ री मैं तो प्रेम-दिवानी,
मेरो दर्द न जाणै कोय ।
मेरे तो गिरधर गोपाल दूसरो ना कोई
मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो ना कोई
जाके सर मोर-मुकुट, मेरो पति सोई
कोई कहे कारो,कोई कहे गोरो
लियो है अँखियाँ खोल
कोई कहे हलको,कोई कहे भारो
लियो है तराजू तौल
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई
कोई कहे छाने,कोई कहे छुवने
लियो है बजन्ता ढोल
तन का गहना मैं सब कुछ दीन्हा
लियो है बाजूबंद खोल
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई
असुवन जल सींच-सींच प्रेम बेल बोई
अब तो बेल फ़ैल गयी
आनंद फल होई
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई
तात-मात भ्रात बंधू
आपणो ना कोई
छाड़ गयी कुल की कान
का करीहे कोई?
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई
चुनरी के किये टोक
ओढली लिए लोई
मोती-मूंगे उतार
बन-माला पोई
मेरे तो गिरधर गोपाल
दूसरो ना कोई
गोबिन्द कबहुं मिलै पिया मेरा
गोबिन्द कबहुं मिलै पिया मेरा।चरण-कंवल को हंस-हंस देखू राखूं नैणां नेरा।
गोबिंद कबहुं मिलै पिया मेरा।
निरखणकूं मोहि चाव घणेरो कब देखूं मुख तेरा।
गोबिंद कबहुं मिलै पिया मेरा।
ब्याकुल प्राण धरे नहिं धीरज मिल तूं मीत सबेरा।
गोबिंद कबहुं मिलै पिया मेरा।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर ताप तपन बहुतेरा।
गोबिंद कबहुं मिलै पिया मेरा।
