Jagannath Rath Yatra: जगन्नाथ रथ की रस्सी क्यों है इतनी खास? जानें क्या है इनका नाम और आध्यात्मिक महत्व

Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ रथ यात्रा की शुरुआत 27 जून से हो रही है। ये यात्रा 9 दिनों तक चलेगी और 4 जुलाई को इसका समापन होगा। जगन्नाथ यात्रा में जिस रस्सी का इस्तेमाल किया जाता है, वो पवित्र होती है। यहां से आप उन रस्सियों के नाम और महत्व के बारे में जान सकते हैं।

Jagannath Rath Yatra 2025: जगन्नाथ भगवान की जय! जगन्नाथ रथ यात्रा 27 जून से शुरू हो रही है। ये रथ की रस्सी केवल एक आम रस्सी नहीं, बल्कि भगवान जगन्नाथ से जुड़ने का एक पवित्र और दिव्य माध्यम है। इसे छूना आत्मिक रूप से समृद्ध होने का दुर्लभ अवसर माना जाता है। ये रस्सी भक्तों के लिए भगवान की कृपा प्राप्त करने का एक शक्तिशाली साधन है। इसे श्रद्धा से छूना या खींचना न केवल पापों से मुक्ति दिलाता है, बल्कि जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि भी लेकर आता है। जब कोई भक्त इस रस्सी को आस्था से पकड़ता है, तो उसका विश्वास और भक्ति और भी दृढ़ हो जाती है। यहां से आप इन रस्सियों के नाम जान सकते हैं। साथ ही हम आपको इनसे जुड़ी धार्मिक मान्यता और महत्व की जानकारी भी दे रहे हैं।

jagannath rath yatra rope name

जगन्नाथ मंदिर की रस्सियों के नाम क्या हैं?

जैसे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के रथों के विशिष्ट नाम होते हैं, वैसे ही इन रथों को खींचने वाली रस्सियों के भी खास और पवित्र नाम हैं। बता दें कि भगवान जगन्नाथ के 16 पहियों वाले नंदीघोष रथ की रस्सी को शंखचूड़ा नाड़ी कहा जाता है। बलभद्र के 14 पहियों वाले तालध्वज रथ की रस्सी को वासुकी नाम से जाना जाता है। सुभद्रा के 12 पहियों वाले पद्मध्वज रथ की रस्सी को स्वर्णचूड़ा नाड़ी कहा जाता है। इन रस्सियों का कार्य केवल रथों को खींचना भर नहीं है, बल्कि धार्मिक दृष्टि से ये अत्यंत शुभ और पवित्र मानी जाती हैं। प्रत्येक रस्सी भगवान की दिव्य शक्ति, ऊर्जा और आशीर्वाद की प्रतीक है, और इनका आध्यात्मिक महत्व रथ यात्रा की गरिमा को और भी बढ़ा देता है।

End of Feed