Guru Ravidas Jayanti 2024 Images, Photo, Png, Poster, Banner, Wallpaper: महान संत, कवि, दर्शनशास्त्री और समाज सुधारक संत रविदास जी ने अपने संपूर्ण जीवन में आचरण की पवित्रता पर सबसे ज्यादा बल दिया। वे धर्म के नाम पर चल रहे अंधविश्वास और आंडबर का विरोध करते थे। उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि धरती पर मौजूद हर एक चीज पर सभी लोगों का समान अधिकार है। इन संदेशों के जरिए उन्होंने लोगों में भाईचारा बढ़ाने का काम किया। हर साल गुरु रविदास जयंती पर संत गुरु रविदास द्वारा दिए गए इन संदेशों को पढ़ा और सुना जाता है। यहां आप देखेंगे रविदास जी के प्रसिद्ध दोहे, संदेश, फोटो और पोस्टर।
Guru Ravidas Jayanti 2024 (गुरु रविदास जयंती 2024)
मन चंगा तो कठौती में गंगा: ये संत रविदास जी द्वारा लिखा हुआ उनका सबसे ज्यादा प्रसिद्ध दोहा माना जाता है। जिसका अर्थ है कि जिस व्यक्ति का मन पवित्र होता है, उसके बुलाने पर मां गंगा भी एक कठौती में आ जाती हैं।
Guru Ravidas Ji Ki photo
ब्राह्मण मत पूजिए जो होवे गुणहीन, पूजिए चरण चंडाल के जो होने गुण प्रवीन: संत रविदास जी कहते हैं कि किसी को सिर्फ इसलिए नहीं पूजा जाना चाहिए क्योंकि वह व्यक्ति किसी पूजनीय पद पर बैठा है। अदर उस व्यक्ति में उस पद के योग्य गुण नहीं हैं तो उसे बिल्कुल भी नहीं पूजना चाहिए। इसकी जगह किसी ऐसा व्यक्ति को पूजना चाहिए जो ऊंचे पद पर तो नहीं है लेकिन बहुत गुणवान है।
Sant Ravidas Ji Ke Dohe
संत रविदास फोटो hd
मन ही पूजा मन ही धूप, मन ही सेऊं सहज स्वरूप: रविदास जी कहते हैं कि निर्मल मन में ही भगवान बसते हैं। अगर आपके मन में किसी के लिए बैर भाव नहीं है, तो आपका मन ही भगवान का मंदिर, दीपक और धूप है। ऐसे पवित्र विचारों वाले मन में प्रभु सदैव निवास करते हैं।
Guru Ravidas ji Ki Photo
रविदास जन्म के कारनै, होत न कोउ नीच, नकर कूं नीच करि डारि है, ओछे करम की कीच: रविदास जी कहते हैं कि कोई भी व्यक्ति किसी जाति में जन्म के कारण नीचा या छोटा नहीं होता है। किसी व्यक्ति को निम्न यानी छोटा उसके कर्म बनाते हैं। इसलिए हमें अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। हमारे कर्म सदैव ऊंचे होने चाहिए।
रैदास कहै जाकै हदै, रहे रैन दिन राम, सो भगता भगवंत सम, क्रोध न व्यापै काम: रविदास जी कहते हैं जिस हृदय में दिन-रात राम के नाम का ही वास रहता है, ऐसा भक्त स्वयं भगवान राम के समान होता है। राम नाम की ऐसी माया है कि इसे दिन-रात जपने वाले व्यक्ति को न तो क्रोध आता है और न ही कभी काम भावना उस पर हावी होती है।
हरि-सा हीरा छांड कै, करै आन की आस
ते नर जमपुर जाहिंगे, सत भाषै रविदास
अर्थ है: हीरे से बहुमूल्य हरी यानि कि भगवान हैं। उनको छोड़कर अन्य चीजों की आशा करने वालों को निश्चय ही नर्क प्राप्त होता है। इसलिए प्रभु की भक्ति को छोडकर इधर-उधर भटकना व्यर्थ है।
कहते हैं जो व्यक्ति भी संत रविदास जी के द्वारा लिखे गए इन दोहों पर अमल करता है तो उसके जीवन की तमाम मुश्किलें दूर हो जाती हैं। रविदास जी के दोहों में जीवन को सही ढंग से जीने का तरीका बताया गया है।
