Guru Pradosh Vrat Upay: हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन मास का आखिरी प्रदोष व्रत कल यानि 26 अक्टूबर को रखा जाएगा। प्रदोष व्रत भगवान शिव और पार्वती की पूजा को समर्पित है। यह व्रत त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। गुरुवार होने के कारण इसे गुरु प्रदोष कहा जाता है। गुरु प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की पूजा पूरे विधि- विधान से की जाती है। ये पूजा प्रदोष काल में की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में खुशियां आती हैं। साथ ही व्यक्ति सभी पापों और कष्टों से मुक्त हो जाता है। गुरु प्रदोष का व्रत शीघ्र करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है। इसके अलावा अगर आप इस दिन कुछ उपाय करते हैं तो आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाएंगी। यहां देखें प्रदोष व्रत उपाय।
इन उपायों को करें
शत्रु पर विजय के लिए
शत्रु को परास्त करने के लिए गुरु प्रदोष के व्रत के दिन शमी के पत्तों को गंगा जल से शुद्ध करके शिवलिंग पर चढ़ाया जाता है। इसके बाद बैठकर 108 बार ओम नमः शिवाय का जाप करें। माना जाता है कि इस उपचार से शत्रु पराजित हो जाते हैं।
सेहत के लिए
गुरु प्रदोष व्रत के दिन जल में काला तिल मिलाकर शिवलिंग से जलाभिषेक करने से तमाम रोगों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही सेहत अच्छी बनी रहती है।
दांपत्य जीवन में सुख के लिए
गुरु प्रदोष के दिन शाम के समय पति-पत्नी को गुड़ और काले तिल से भोलेनाथ का अभिषेक करना चाहिए। इससे पारिवारिक जीवन में शांति आती है और सारा तनाव दूर हो जाता है। साथ ही स्त्री-पुरुष के बीच प्रेम बना रहता है।
घर में समद्धि के लिए
पैसा आने पर भी घर में बरकत नहीं रहती है। गुरु प्रदोष व्रत वाले दिन सुबह अपने घर की छत पर एक मुट्ठी काले तिल रखें। ऐसा माना जाता है कि जब पक्षी इस तिल को खाएंगे तो आपके जीवन का दुख धीरे-धीरे खत्म हो जाएंगे।
