Guru Ast 2026 : वैदिक ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, धर्म, भाग्य, विवाह, संतान, उच्च शिक्षा, गुरु कृपा, धन और समृद्धि का परम कारक ग्रह माना जाता है। जब गुरु सूर्य के अत्यधिक निकट आ जाते हैं, तो इस खगोलीय स्थिति को गुरु का अस्त होना कहा जाता है। 15 जुलाई 2026 की शाम 7 बजकर 59 मिनट पर देवगुरु बृहस्पति कर्क राशि में अस्त हो चुके हैं।
संभलकर रहें ये 5 राशियां
गुरु 12 अगस्त 2026 की सुबह तक इसी अवस्था में रहेंगे। हालांकि इस गोचर के दौरान गुरु अपनी उच्च राशि कर्क में ही रहेंगे, लेकिन सूर्य के तेज प्रभाव के कारण उनकी शुभ फल देने की क्षमता कुछ समय के लिए धीमी पड़ जाएगी। ऐसे में जिन राशियों के लिए गुरु भाग्य, करियर, विवाह, धन या शिक्षा के मुख्य कारक हैं, उन्हें अगले 28 दिनों तक विशेष सावधानी बरतनी होगी।
गुरु अस्त का क्या होगा असर
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, गुरु के अस्त होने से मानव जीवन के विवेक, निर्णय क्षमता, विवाह संबंधी कार्यों, धार्मिक अनुष्ठानों और आर्थिक विस्तार की गति काफी हद तक मंद हो जाती है। यही कारण है कि इस पूरी अवधि में विवाह, उपनयन, गृहप्रवेश और कई बड़े मांगलिक संस्कारों के मुहूर्त टाल दिए जाते हैं। हालांकि, इस गोचर का प्रभाव हर व्यक्ति पर एक जैसा नहीं होता, बल्कि यह जातक की व्यक्तिगत जन्मकुंडली, वर्तमान महादशा और ग्रहों की स्थिति के अनुसार बदलता रहता है। आइए जानते हैं कि वे कौन सी राशियां हैं जिन्हें इस दौरान सबसे ज्यादा सचेत रहने की जरूरत है।
मेष राशि
मेष राशि के लोगों के लिए गुरु का अस्त होना चतुर्थ भाव में हो रहा है। चतुर्थ भाव मुख्य रूप से हमारे सुख, मां, घर और भूमि-भवन का प्रतिनिधित्व करता है। गुरु के अस्त रहने से आपके घर-परिवार में वैचारिक मतभेद खड़े हो सकते हैं, जिससे मानसिक अशांति का वातावरण बन सकता है। संपत्ति से जुड़े मामलों या भूमि विवादों के सुलझने में देरी होगी। इस अवधि में नया वाहन खरीदने या किसी बड़ी संपत्ति में निवेश करने की योजना को कुछ समय के लिए टाल देना ही बेहतर रहेगा। साथ ही अपनी मां के स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखें। चतुर्थ भाव सुख और मानसिक शांति का कारक है, जहां गुरु के कमजोर होने से इन क्षेत्रों में मिलने वाला पारिवारिक सहयोग कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकता है।
उपाय : सोमवार और गुरुवार के दिन शिवलिंग पर जल का अभिषेक करें। पीली मिठाइयों का दान करें और नियमित रूप से अपने माता-पिता के चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लें।
कर्क राशि
देवगुरु बृहस्पति आपकी ही राशि यानी प्रथम भाव में अस्त हुए हैं, इसलिए इसका सीधा असर आपके व्यक्तित्व और मानसिक स्थिति पर पड़ेगा। इस दौरान आपके आत्मविश्वास में अचानक उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कई बार बेहतरीन और सही अवसर सामने होने के बावजूद आप सही समय पर निर्णय नहीं ले पाएंगे।
करियर के क्षेत्र में मनमुताबिक परिणाम मिलने में थोड़ा विलंब हो सकता है। पारिवारिक मोर्चे पर भी आपकी बातों का गलत अर्थ निकाला जा सकता है, जिससे मतभेद की स्थिति बनेगी। स्वास्थ्य के लिहाज से आपको पेट और लीवर से जुड़ी दिक्कतों के प्रति सावधान रहना होगा। प्रथम भाव हमारे आत्मबल और निर्णय क्षमता को दर्शाता है, इसलिए यहां गुरु के कमजोर होने से मानसिक स्पष्टता की कमी होना स्वाभाविक है।
उपाय : आपको प्रतिदिन भगवान विष्णु को पीले फूल अर्पित करने चाहिए। हर गुरुवार को 'ॐ बृं बृहस्पतये नमः' मंत्र की कम से कम एक माला का जाप करें और चने की दाल व हल्दी का दान करें।
मकर राशि
मकर राशि के जातकों के लिए गुरु का अस्त होना उनके सप्तम भाव में हुआ है। यह भाव हमारे वैवाहिक जीवन, बिजनेस पार्टनरशिप और सामाजिक संबंधों का प्रतिनिधित्व करता है। इस अवधि में पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर अनबन या वैचारिक मतभेद गहरा सकते हैं। जो लोग व्यापार में किसी के साथ साझेदारी में हैं, उन्हें लेन-देन में पूरी पारदर्शिता रखनी होगी।
किसी भी नए व्यावसायिक समझौते या कागजी कार्रवाई पर हस्ताक्षर करने से पहले दस्तावेजों को बहुत अच्छी तरह से पढ़ लेना ही आपके हित में होगा। सप्तम भाव रिश्तों की नींव है और यहां गुरु का अस्त होना आपके आपसी संबंधों और साझेदारियों में धैर्य की कड़ी परीक्षा ले सकता है।
उपाय : गुरुवार के दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करें। घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की संयुक्त रूप से पूजा-अर्चना करें और किसी योग्य ब्राह्मण को पीले मौसमी फल दान करें।
तुला राशि
तुला राशि के लोगों के लिए देवगुरु बृहस्पति का अस्त होना दशम भाव में हो रहा है। इसके प्रभाव से नौकरीपेशा लोगों को प्रमोशन या नई जिम्मेदारियां मिलने में रुकावटों का सामना करना पड़ सकता है। कार्यस्थल पर वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिलने में कमी आएगी, जिससे मानसिक तनाव बढ़ सकता है। व्यापारियों को भी अपने बड़े प्रोजेक्ट्स के पूरा होने में देरी का सामना करना पड़ सकता है।
अगर आप इस अवधि में नौकरी बदलने का विचार कर रहे हैं, तो जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने से बचें। 10वां भाव हमारे कर्म, करियर और सामाजिक मान-प्रतिष्ठा का कारक है। यहां गुरु के कमजोर पड़ने से आपकी कड़ी मेहनत का पूरा फल मिलने में थोड़ा वक्त लग सकता है।
उपाय : प्रत्येक गुरुवार को नियमित रूप से विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। इसके साथ ही, जरूरतमंद विद्यार्थियों को उनकी पढ़ाई से जुड़ी पुस्तकें या पीली स्टेशनरी सामग्री दान में दें।
मीन राशि
मीन राशि के जातकों के लिए यह समय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि गुरु आपकी राशि के स्वामी हैं और वे आपके पंचम भाव में अस्त हो रहे हैं। इसके प्रभाव से विद्यार्थियों को पढ़ाई में ध्यान लगाने और एकाग्रता बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। संतान पक्ष की ओर से कोई चिंताजनक स्थिति बन सकती है।
यदि आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या किसी भी जोखिम भरे क्षेत्र में निवेश करते हैं, तो बिना सोचे-समझे बड़ा पैसा लगाने से बचें, अन्यथा नुकसान उठाना पड़ सकता है। प्रेम संबंधों में भी गलतफहमियों से बचने के लिए धैर्य बनाए रखना जरूरी होगा। 5वां भाव हमारी बुद्धि, शिक्षा, संतान और वित्तीय निवेश का प्रतिनिधित्व करता है। यहां गुरु के कमजोर होने से आपकी तार्किक क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति कुछ समय के लिए प्रभावित हो सकती है।
उपाय : हर गुरुवार को केले के पेड़ की पूजा करें और जल अर्पित करें। 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जाप करें और गरीब या अनाथ बच्चों की शिक्षा में आर्थिक मदद करें।
गुरु अस्त के दौरान क्या करें और क्या करने से बचें
इस संक्रमण काल के दौरान अपने जीवन में सकारात्मकता बनाए रखने के लिए ज्योतिषीय शास्त्रों में कुछ विशेष नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करना अत्यंत फलदायी होता है।
क्या करें
हमेशा अपने माता-पिता, गुरुजनों और शिक्षकों का हृदय से सम्मान करें। गुरुवार के दिन पीले रंग के अनाज, कपड़े या फलों का दान करें। भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की नियमित उपासना करें। विष्णु सहस्रनाम, श्रीसूक्त और देवगुरु के बीज मंत्रों का जप करना इस समय में मानसिक शांति और आध्यात्मिक बल प्रदान करता है।
क्या न करें
इस 28 दिनों की अवधि में किसी भी प्रकार के अहंकार या अति-आत्मविश्वास में आकर कोई बड़ा व्यावसायिक या पारिवारिक फैसला न लें। बिना किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह के बड़ा आर्थिक निवेश करने से बचें। कभी भी किसी बुजुर्ग या ज्ञानी व्यक्ति का अपमान न करें। किसी भी प्रकार के कानूनी या आर्थिक दस्तावेज पर बिना पूरी जांच-पड़ताल किए जल्दबाजी में हस्ताक्षर बिल्कुल न करें।
डिसक्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है और ज्योतिष विद्या के अच्छे जानकार लेखक द्वारा विश्लेषण करके दी गई है। यह केवल सूचना के लिए दी जा रही है। आपके ऊपर इसका प्रभाव आपकी व्यक्तिगत जन्मकुंडली में ग्रहों की स्थिति और महादशाओं पर भी निर्भर करेगा। Times Now Navbharat इसकी पुष्टि नहीं करता है।
