Totke for wealth: समाज में खुद ही पहचान बनाने के लिए सुख के साथ समृद्धि का वास भी जीवन में होना जरूरी है। बहुत से लोग कुछ ज्यादा नहीं करते लेकिन धन संपदा से परिपूर्ण होते हैं तो वहीं कुछ लोग वो भी होते हैं जो दिन रात एक करके मेहनत करते हैं लेकिन हाथ में लक्ष्मीजी का वास नहीं हो पाता।
ज्योतिषशास्त्र में कुछ विशेष उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर धन की कमी को कुछ ही दिनों में दूर किया जा सकता है। हां इन्हें अपनाएं तो जरूर लेकिन अपनी मेहनत के साथ किसी तरह का समझौता न करें।
आर्थिक संकट का होगा निवारण इस उपाय से
यदि आप किसी प्रकार के आर्थिक संकट से ग्रस्त हैं या आपके कार्यों में बाधा आ रही हो तो शुक्लपक्ष के पहले शनिवार को पानी वाले ग्यारह नारियल, सवा किलो जौं, सवा किलो कीकर की लकड़ी के कोयले को काले कपड़े में बांधकर रखें। फिर सवा किलो चने, लकड़ी के दो कच्चे कोयले और लोहे की आठ नई बड़ी कीलें, एक काले कपड़े में रखें। उपर से पहली वाली पोटली रखकर उस कपड़े में चार गांठें बांध दें। कुर्ता पायजामा और चप्पल पहनकर पूजन स्थल पर जाएं, जिन्हें आप वहीं पर ही छोड़ सकें।
सभी सामग्री के साथ किसी नदी के किनारे पर जाएं। अपना मुख पश्चित दिशा की ओर करके बैठ जाएं और काले कपड़े की पोटलियां खाेलें। दाएं हाथ में एक नारियल उठाएं और कान से उसका स्पर्श करवाकर सिर के पिछले हिस्से की ओर से जल में प्रवाहित कर दें। ये करते समय मानसिक रूप से सोचें कि आर्थिक संकट आपसे दूर होते जा रहा है। इसी प्रकार एक− एक करके सारे नारियल प्रवाहित कर दें। इसके बाद बची हुई सामग्री क्रमशः एक− एक करके प्रवाहित करें। पहने हुए कुर्ता पायजामा और चप्पल उतारकर वहीं छोड़ दें और साथ लेकर गए वस्त्र धारण करके एवं नदी को हाथ जोड़कर वापस आ जाएं। वापस लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें।
इस प्रकार यह प्रयोग लगातार आठ शनिवार तक करें। इसमें आपको वस्त्र और चप्पल केवल पहले शनिवार को ही उतारने हैं। अंतिम शनिवार के अगले दिन अर्थात रविवार को ठीक 12 बजे एक नारियल से यह प्रक्रिया पुनः करें। किंतु रविवार को नारियल सिर के पीछे से न घुमाएं बल्कि सिर के अगले हिस्से से घुमाते हुए सात बार उसारें और दाेनों हाथाें से नदी में प्रवाहित कर दें। पुनः यही सोचें कि आपके आर्थिक संकट आपसे दूर हो रहे हैं। नारियल के लोप होने के बाद आप पीछे देखे बिना घर आ जाएं। घर में प्रवेश करने से पहले हाथ−पैर अवश्य धाेएं। इस उपाय में कुछ धन व्यय होगा लेकिन इसका फल अवश्य प्राप्त होगा।
(डिस्क्लेमर : यह पाठ्य सामग्री आम धारणाओं और इंटरनेट पर मौजूद सामग्री के आधार पर लिखी गई है। टाइम्स नाउ नवभारत इसकी पुष्टि नहीं करता है।)
