Dwijpriya Sankashti Chaturthi Today (चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि, मंत्र, तरीका, पूजा विधि): आज 5 फरवरी 2026 को फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि है। इस दिन द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत किया जा रहा है। संकष्टी चतुर्थी भगवान गणेश और चंद्रदेव दोनों की आराधना का विशेष दिन माना जाता है। इस व्रत में दिनभर उपवास रखने के बाद रात को चंद्र दर्शन और अर्घ्य देने से व्रत पूर्ण होता है। मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा से संकट दूर होते हैं और चंद्रदेव को अर्घ्य देने से मन की अशांति समाप्त होती है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की विधि
भगवान गणेश और चंद्रमा की पूजा
संकष्टी चतुर्थी का व्रत चंद्र दर्शन के बिना अधूरा माना जाता है। चंद्रदेव को मन, भावना और मानसिक संतुलन का कारक माना गया है। मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से मन के विकार शांत होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। संकष्टी चतुर्थी पर रात की पूजा चंद्र उदय से पहले कर ली जाती है। पूजा के लिए सबसे पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें। पूजा स्थल पर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। उन्हें दूर्वा, लाल या पीले फूल, चावल, सिंदूर और मोदक या लड्डू का भोग लगाएं। दीपक और धूप जलाकर ‘ॐ गं गणपतये नमः’ मंत्र का जाप करें। इस दिन गणेश जी से जीवन की बाधाएं दूर करने और मन को स्थिर रखने की प्रार्थना की जाती है।
आज चंद्रमा को अर्घ्य कब दें?
संकष्टी चतुर्थी पर चंद्र उदय के बाद ही अर्घ्य दिया जाता है। आज 5 फरवरी 2026 को चंद्रमा रात्रि 9 बजकर 35 पर उदय होंगे। स्थान के अनुसार चंद्र दर्शन का समय थोड़ा आगे-पीछे हो सकता है, इसलिए जैसे ही चंद्रमा दिखाई दे, उसी समय अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। अगर बादल हों और चंद्र न दिखे, तो अनुमानित समय पर ही चंद्रदेव का ध्यान करके अर्घ्य दिया जा सकता है।
चंद्रमा को अर्घ्य देने की सही विधि
चंद्रमा को अर्घ्य देने के लिए छत या खुले आंगन में जाएं, जहां से चंद्र दर्शन स्पष्ट हो सके। चांदी या मिट्टी का लोटा लें और उसमें दूध या साफ पानी भरें। दूध में थोड़ा सा गुड़ या चीनी मिलाना शुभ माना जाता है। हाथ में अक्षत रखें और चंद्रमा की ओर मुख करके खड़े हों। मन में शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करें।
लोटे से चंद्रमा की दिशा में धीरे-धीरे जल या दूध अर्पित करें। पूरा लोटा खाली न करें, केवल थोड़ा अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय ‘ॐ चंद्राय नमः’ या ‘ॐ सोमाय नमः’ मंत्र का जप करें। इसके बाद हाथ जोड़कर चंद्रदेव को नमन करें और मानसिक रूप से व्रत पूर्ण होने का संकल्प लें।
संकष्टी चतुर्थी व्रत का पारण कैसे करें?
चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही संकष्टी चतुर्थी का व्रत खोला जाता है। सबसे पहले गणेश जी को भोग अर्पित करें, फिर प्रसाद ग्रहण करें। व्रत खोलते समय सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। कई लोग फल, दूध या हल्का भोजन लेकर पारण करते हैं। मान्यता है कि सही विधि से किया गया पारण व्रत का पूरा फल देता है और जीवन में सकारात्मकता लाता है।
