Chaitra Navratri 2024: हिंदू पांचांग के अनुसार हर साल चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत होती है। इस साल चैत्र नवरात्रि का पर्व 9 अप्रैल से शुरू हो रहा है। इसी के साथ ही इसका समापन 17 अप्रैल को होगा। नवरात्रि के दौरान माता के भक्त माता रानी की विशेष पूजा करते हैं। इस दौरान रामायण का पाठ करना और दुर्गा सप्तशती का पाठ करना बहुत ही शुभ माना गया है। ऐसा माना जाता है कि जो भी साधक नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करता है, उसकी सारी मनोकामना पूरी होती है। ऐसे में आइए जानते हैं दुर्गा सप्तशती पाठ के नियम और फायदे।
Durga Saptsati Path Niyam (दुर्गा सप्तशती पाठ नियम)
- दुर्गा सप्तशती का पाठ हमेशा स्नान के बाद साफ वस्त्र धारण करके ही करना चाहिए।
- नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए माता की ओर मुख करके बैठें।
- पुस्तक को किसी लाल कपड़े पर या चौकी पर रखकर ही पाठ करें।
- नवरात्रि के पहले दिन से ही दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करना चाहिए।
- पाठ के दौरान लाल रंग के वस्त्र पहनें
- पाठ करते समय किसी से भी बात ना करें।
- पाठ करते समय साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें।
- दुर्गा सप्तशती के पूरे 13 अध्याय को एक ही दिन में पूरा करना चाहिए। अगर ऐसा नहीं हो पाता है तो आप 8 दिन में इसे पूरा कर सकते हैं।
- जो लोग दुर्गा सप्तशती का पाठ करते हैं उन्हें मांस, शराब, लहसुन या प्याज का सेवन नहीं करना चाहिए।
Durga Saptsati Path Vidhi (दुर्गा सप्तशती पाठ विधि)
- दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करने से पहले स्नान करके साफ वस्त्र पहन लें।
- उसके बाद साफ चौकी पर लाल कपड़ा बिछाकर दुर्गा सप्तशती की पुस्तक को रखें।
- फिर नवार्ण मंत्र, कवच, इसके बाद कीलक और अर्गला स्तोत्र पाठ करें।
- उसके बाद मां का ध्यान करें और मां से आशीर्वाद मांगे
- उसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ शुरू करें।
- पाठ करते समय मुख ईशान कोण की तरफ रखें।
- जब दुर्गा सप्तशती का पाठ पूरा हो जाए तो मां से अपनी किसी भी प्रकार की गलती के लिए क्षमा मांगे।
