Disha Gyan: धार्मिक कामों में रखा जाता है दिशाओं का विशेष ध्यान, ये है इसकी वजह

  • Authored by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Jan 28, 2023, 10:06 PM IST

Disha Gyan: देव कार्यों के लिए निश्चित है पूर्व दिशा तो यम देवता का होता है दक्षिण दिशा में वास। विविध प्रसंगों के लिए विविध दिशाएं निर्धारित की गयी हैं। आइये आपको बताते हैं किस संस्कार के लिए किस दिशा संबंधित कार्य करना रहता है शुभ। चलिए जानते हैं इनसे जुड़ी खास बातें।

KEY HIGHLIGHTS
  • शास्त्र एवं खगोल विज्ञान में होती हैं दस दिशाएं
  • हर दिशा के होते हैं अपने अलग देवता एवं महत्व
  • विविध प्रसंगों में होता विविध दिशा का महत्व


Disha Gyan: चार मुख्य दिशा, चार उपदिशा और उर्ध्व यानि आकाश की ओर और अधाे यानि नीचे की ओर की दिशा मिलाकर कुल दस दिशाएं शास्त्राें के साथ खगोल विज्ञान में भी निहित हैं। बहुत बार सुना होगा कि देवा पूजा पूर्व दिशा, पितरों के निमित्त कर्म दक्षिण दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। लेकिन इसके पीछे की वजह से अधिकांश लोग अंजान ही रहते हैं।

Disha Gyan: धार्मिक कामों में रखा जाता है दिशाओं का विशेष ध्यान, ये है इसकी वजह

सबसे पहले इसके पीछे के वैज्ञानिक दृष्टिकोण को समझना जरूरी है। दिशाओं के बारे में विद्वानों का मत है कि पूर्व−पश्चिम दिशा का संबंध सूर्य आकर्षण से होता है। उत्तर−दक्षिण दिशा का नाता ध्रुवाें के चुंबकीय आकर्षण से है। देव कार्य के लिए पूर्व दिशा तय की गयी है। इसके पीछे कारण है कि ब्रह्ममुहूर्त से दोपहर तक सूर्य का आकर्षण रहने से ज्ञान तंतु विशेष रूप से एक्टिव रहते हैं। यम देवता का दक्षिण दिशा से संबंध होता है। पितरों का निवास दक्षिण दिशा की ओर होने से इनका आह्वान दक्षिण दिशा में स्थित होकर उत्तर की ओर मुख करके करते हैं। श्राद्ध करने वाले का मुख दक्षिण की ओर रहता है। सनातन धर्म में हर दिशा का एक देवता नियुक्त किया गया है, जिसे दिगपाल कहा जाता है।

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