Devshayani Ekadashi Vrat Niyam: देवशयनी एकादशी पर खाने के क्या नियम हैं? निर्जला, फलाहार या नक्तभोजी- कौन सा बेहतर?

Devshayani Ekadashi 2026 Vrat Niyam: क्या आप भी देवशयनी एकादशी का व्रत रखने की सोच रहे हैं? अगर हां, तो चलिए जानें देवशयनी एकादशी का व्रत निर्जला, फलाहार या नक्तभोजी कैसे रखा जाता है। साथ ही इस व्रत में खान-पान से जुड़े अन्य नियम क्या हैं।

Devshayani Ekadashi 2026 Vrat Niyam: जगत के पालनहार भगवान विष्णु को समर्पित देवशयनी एकादशी को अत्यंत शक्तिशाली और महापुण्यदायी माना जाता है, जिसका व्रत हर साल आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। मान्यता है कि विधिपूर्वक देवशयनी एकादशी का व्रत रखने से सभी प्रकार के पाप नष्ट होते हैं और जीवन में खुशियों का स्थायी वास होता है। हालांकि, इस व्रत को लेकर लोगों के मन में अक्सर सवाल रहता है कि इसे निर्जला, फलाहार या नक्तभोजी किस प्रकार रखना ज्यादा फलदायी होता है? यदि व्रत में कुछ खाया जा सकता है तो वो कौन कौन सी चीजें हैं? यहां पर आपको देवशयनी एकादशी के व्रत में खान-पान से जुड़े ऐसे ही सभी महत्वपूर्ण सवालों के जवाब मिल जाएंगे।

देवशयनी एकादशी व्रत 2026, देवशयनी एकादशी व्रत के खाने से जुड़े नियम

देवशयनी एकादशी व्रत में क्या खा सकते हैं और क्या नहीं?

देवशयनी एकादशी व्रत कैसे रखें?

पौराणिक शास्त्रों में बताया गया है कि देवशयनी एकादशी का व्रत निर्जला, फलाहार और नक्तभोजी तीनों में से किसी भी तरह से रखा जा सकता है। निर्जला व्रत में न तो कुछ खाया जाता है और न ही कुछ पीने की इजाजत होती है। वहीं, फलाहार व्रत में केवल फलों का सेवन किया जाता है, जबकि नक्तभोजी व्रत में सूर्यास्त के बाद केवल एक बार खाना खाया जाता है।

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