Buddha Purnima 2024: भगवान बुद्ध किसके अवतार थे? यहां पढ़िए उनके जीवन से जुड़ी रोचक कथा

Buddha Purnima 2024: महात्मा बुद्ध ने बौद्ध धर्म के स्थापना की थी। इन्होंने पूरी दुनिया को शांति, प्रेम और एकता का पाठ पढ़ाया। राजा के पुत्र होते हुए भी इन्होंने भिक्षु की तरह जीवन यापन किया। आइए जानते हैं इनके जीवन से जुड़ी कुछ रोचक बातें और इनके अवतार के बारे में।

Gautam Budh Avtar Katha In Hindi: गौतम बुद्ध का जन्म लगभग 563 ई.पूर्व में वैशाख महीने की पूर्णिमा तिथि के दिन हुआ था। इस कारण हर साल वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। महात्मा बुद्ध ने ही बौद्ध धर्म की स्थापना की थी। इनका जन्म कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन के यहां लुम्बिनी नामक वन में हुआ था। इनका नाम सिद्धार्थ था। गौतम बुद्ध की उपाधि तो इनको ज्ञान की प्राप्ति के बाद मिली। 19 वर्ष की आयु में ही सिद्धार्थ ने अपना गृह त्याग दिया और ज्ञान की प्राप्ति के लिए वन की ओर गमन कर लिया। आज हम आपको बताते हैं कि गौतम बुद्ध किसके अवतार थे और इनके जीवन के प्रमुख घटनाओं के बारे में।

गौतम बुद्ध किसके अवतार थे

शास्त्र पुराणों के अनुसार महात्मा बुद्ध को जगत के पालनहार भगवान विष्णु के दशावतार में से एक नौवें अवतार माने गए हैं और उनके पूरे 24 अवतारों में गौतम बुद्ध को 23वां अवतार माना जाता है, हालांकि बहुत लोगों का मानना है कि गौतम बुद्ध विष्णु के अवतार नहीं हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु ने पूरी दुनिया में प्रेम, शांति और सद्भावना फैलाने के लिए बुद्ध का अवतार लिया और बौद्ध धर्म को स्थापित किया। उन्होंने बु्द्ध के रूप में संसार में एकता का प्रचार किया और स्त्रि, पुरुष के प्रति दया भाव को उपदेश दिया।

किससे हुआ था गौतम बुद्ध का विवाह

गौतम बुद्ध का विवाह 16 वर्ष की आयु में कोलीय वंश के राजा सुप्पबुद्ध की बेटी यशोधरा के साथ हुआ था। इन दोनों को राहुल नाम का एक बेटा भी था। परिवार के कारण बुद्ध ने विवाह तो कर लिया, लेकिन उनका मन फिर भी वैराग की ओर ही था। उनको संसार की ये झूठी खुशियों का तनिक भी मोह ना था। एक दिन उन्होंने चुपचाप रात्रि प्रहर में अपनी पति और बेटे को छोड़कर जंगल की ओर गमन कर लिया।

बुद्ध ने किस अवस्था में गृह त्याग किया

महात्मा बुद्ध ने 19 वर्ष की अवस्था में अपने गृह को त्याग दिया था। बु्द्ध के जीवन का लक्ष्य केवल सांसारिक जीवन में लुप्त होकर रहना नहीं था। उनको जीवन के सत्य को खोजना था और संसार को एक नया मार्ग दिखाना था। बुद्ध के मन में बहुत से सवाल थे। जिनका उत्तर उनको खोजना था। 6 साल की कठिन तपस्या के बाद उनको जीवन का दिव्य ज्ञान प्राप्त हुआ। उसके बाद वो सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बन गए।

बुद्ध का महानिर्वाण

भगवान बुद्ध ने 40 सालों तक धर्म का प्रचार, प्रसार किया और बुद्ध धर्म को स्थापित किया। उसके बाद 80 वर्ष की उम्र में उन्होंने उत्तर प्रदेश के कुशीनगर में पावापुरी नामक जगह पर 483 ई.पू में वैशाख पूर्णिमा के दिन बुद्ध को महानिर्वाण की प्राप्ति हो गई। बुद्ध पूर्णिमा के दिन यहां के बौद्ध मंदिरों में बुद्ध धर्म के लोगो दर्शन के लिए आते हैं।

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