Bhaum Pradosh Vrat Katha: भौम प्रदोष व्रत कथा, बुढ़िया और हनुमान जी की कहानी, मंगल प्रदोष व्रत कथा हिंदी में यहां पढ़ें

Pradosh Vrat Katha in Hindi: आज यानी 22 जुलाई को भौम प्रदोष व्रत हैं। इस दिन भोलेनाथ की पूजा की जाती है। अगर आप भौम प्रदोष की पूजा करते हैं तो आपको इसकी व्रत कथा का पाठ भी जरूर करना चाहिए। यहां से आप भौम प्रदोष व्रत कथा हिंदी में पढ़ सकते हैं।

Pradosh Vrat Katha in Hindi: हर महीने की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष तिथि का व्रत किया जाता है। प्रदोष तिथि भोलेनाथ को समर्पित है। वहीं, जब ये तिथि मंगलवार के दिन पड़ती है तो इसे भौम प्रदोष व्रत कहते हैं। मान्यता है इस व्रत को करने से व्यक्ति को कर्ज और रोग से छुटकारा मिल जाता है। व्रत में कथा पढ़ने का भी विशेष महत्व है। यहां से आप भौम प्रदोष व्रत की कथा पढ़ सकते हैं।

भौम प्रदोष व्रत कथा (Photo Source: Canva)

भौम प्रदोष व्रत कथा

सूतजी बोले- अब मैं मंगल त्रयोदशी प्रदोष व्रत का विधि विधान कहता हूं। मंगलवार का दिन व्याधियों का नाशक है। इस व्रत में एक समय व्रती को गेहूं और गुड़ का भोजन करना चाहिए। इस व्रत के करने से मनुष्य सभी पापों व रोगों से मुक्त हो जाता है इसमें किसी प्रकार का संशय नहीं है। अब मैं आपको उस बुढ़िया की कथा सुनाता हूं, जिसने यह व्रत किया व मोक्ष को प्राप्त हुई। अत्यन्त प्राचीन काल की घटना है। एक नगर में एक बुढ़िया रहती थी। उसके मंगलिया नाम का एक पुत्र था। वृद्धा को हनुमानजी पर बड़ी श्रद्धा थी। वह प्रत्येक मंगलवार को हनुमानजी का व्रत रखकर यथाविधि उनका भोग लगाती थी। इसके अलावा मंगलवार को एक न तो घर लीपती थी और न ही मिट्टी खोदती थी।

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