Bar Amavasya Puja Vidhi: बड़ अमावस्या यानी वट सावित्री व्रत में बरगद के पेड़ की पूजा कैसे करें, यहां जानिए पूरी विधि

Bar Amavasya Puja Vidhi: ज्येष्ठ अमावस्या को विशेष रूप से वट सावित्री व्रत के रूप में मनाया जाता है, जिसमें बरगद यानी वट वृक्ष की पूजा की जाती है। यह पूजा पति की लंबी उम्र, संतान सुख और अखंड सौभाग्य की कामना से की जाती है। चलिए आपको बताते हैं बड़ अमावस्या पर बरगद के पेड़ की सरल पूजा विधि।

Bar Amavasya Puja Vidhi: ज्येष्ठ अमावस्या को बड़ अमावस्या पर भी कहा जाता है क्योंकि इस दिन वट यानी बरगद के पेड़ की पूजा होती है। सनातन धर्म में वट वृक्ष को "अक्षयवट" भी कहा जाता है, जिसका अर्थ है – जिसका फल कभी नष्ट नहीं होता। धार्मिक मान्यता के अनुसार बरगद के पेड़ में ब्रह्मा, विष्णु और शिव तीनों का वास माना गया है। इसलिए इसे देववृक्ष भी कहा जाता है। वट सावित्री व्रत की कथा के अनुसार, सावित्री ने ज्येष्ठ अमावस्या के दिन वट वृक्ष के नीचे ही अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस लिए थे। कहते हैं तब यह वृक्ष पतिव्रता धर्म का प्रतीक बन गया और हर साल ज्येष्ठ अमावस्या पर महिलाएं अपने पति की दीर्घायु के लिए इस पेड़ की पूजा करने लगीं।

वट सावित्री व्रत के दिन वट वृक्ष की पूजा विधि (Vat Savitri Vrat Mein Bargad Ke Ped Ki Puja Vidhi)

  • सुबह स्नान के बाद व्रत का संकल्प लेकर वट वृक्ष की पूजा करें।
  • कुछ स्थानों पर महिलाएं दिन में भी पूजा करती हैं, परंतु प्रातःकालीन पूजा श्रेष्ठ मानी जाती है।
  • वट वृक्ष यानी बरगद के पेड़ की जड़ के पास साफ जगह चुनें।
  • वहां पर रंगोली या हल्दी से चौक बनाएं।
  • वृक्ष की जड़ में जल, दूध और गंगाजल अर्पित करें।
  • वृक्ष को रोली, हल्दी और अक्षत लगाएं।
  • मौली लेकर वृक्ष के चारों ओर 7, 11 या 21 बार परिक्रमा करें और हर परिक्रमा में मौली लपेटते जाएं।
  • फूल, फल और मिठाई चढ़ाएं।
  • दीपक और धूप जलाकर वृक्ष की पूजा करें।
  • सावित्री और सत्यवान की कथा पढ़ें या श्रवण करें।
  • कथा के बाद प्रार्थना करें: "हे वट वृक्ष! जिस प्रकार सावित्री ने अपने पति को यमराज से पुनः प्राप्त किया, उसी प्रकार मेरे पति को दीर्घायु और स्वास्थ्य प्रदान करें।"
  • फिर सत्तू, चना, फल-मिठाई आदि का भोग अर्पित करें।
  • पूजा के बाद भोग को प्रसाद रूप में स्वयं ग्रहण करें और परिवार में भी बांटें।

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