Ashadha Pradosh Vrat Date 2024: कब रखा जाएगा आषाढ़ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत, नोट करें सही तिथि और महत्व

Ashadha Pradosh Vrat Date 2024: हर महीने में दो प्रदोष व्रत रखा जाता है। एक प्रदोष व्रत कृष्ण पक्ष और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है। ऐसे में आइए जानते हैं आषाढ़ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा। यहां जानें सही तिथि और महत्व।

Ashadha Pradosh Vrat Date 2024: प्रदोष व्रत हर महीने की त्रयोदशी तिथि के दिन रखा जाता है। ये व्रत भगवान शिव की पूजा को समर्पित होता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा- अर्चना प्रदोष काल में की जाती है। प्रदोष का व्रत रखने से घर परिवार में सुख, समृद्धि आती है। इसके साथ ही प्रदोष का व्रत करने से साधक को मनवांछित फल की प्राप्ति होती है। इस बार आषाढ़ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत गुरुवार के दिन पड़ेगा, इसलिए वो गुरु प्रदोष व्रत कहलाएगा। आइए जानें आषाढ़ मास का दूसरा प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा और इसके महत्व के बारे में।

Ashadha Pradosh Vrat Date 2024 (आषाढ़ मास दूसरा प्रदोष व्रत 2024)

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ महीने की शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 18 जुलाई को रात 8 बजकर 43 मिनट पर होगी। वहीं इस तिथि का समापन 19 जुलाई को शाम 7 बजकर 42 मिनट पर होगा। ऐसे में आषाढ़ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 18 जुलाई को रखा जाएगा।

Ashadha Pradosh Vrat Shubh Muhurat (आषाढ़ प्रदोष व्रत शुभ मुहूर्त 2024)

हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल आषाढ़ महीने का दूसरा प्रदोष व्रत 18 जुलाई 2024 को रखा जाता है। इस दिन रात को 8 बजकर 44 मिनट से लेकर 9 बजकर 22 मिनट तक का समय भगवान शिव की पूजा के लिए शुभ रहेगा।

Ashadha Pradosh Vrat Puja Vidhi (आषाढ़ मास प्रदोष व्रत पूजा विधि)

  • इस दिन सुबह स्नान के बाद शिव जी का ध्यान लगाएं और व्रत का संकल्प लें।
  • उसके बाद शिव और माता पार्वती की प्रतिमा साफ चौकी पर स्थापित करें।
  • फिर शिव जी को फूल,बेलपत्र, अक्षत और भांग, धतूरा अर्पित करें।
  • शाम के समय में भी पूजा करें और शिव मंदिर में जाकर शिवलिंग पर जल अर्पित करें।
  • अंत में कथा का पाठ करें और आरती करके भोग लगाएं।

Guru Pradosh Vrat Importance (गुरु प्रदोष व्रत महत्व)

गुरुवार के दिन पड़ने वाले प्रदोष व्रत को गुरु प्रदोष व्रत के नाम से जाना जाता है। गुरु प्रदोष का व्रत रखने से साधक को शिव जी के साथ- साथ भगवान बृहस्पति की भी कृपा प्राप्त होती है। इसके साथ जिन लोगों का विवाह नहीं हो रहा है उनके भी विवाह के योग बनते हैं और इस व्रत को करने से संतान सुख की भी प्राप्ति होती है।

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