अक्षत गुप्ता से जानें वो 5 त्याग जो हर ऋषि करता है, पांचवां त्याग है सबसे बड़ा

हिंदू धर्म में त्याग को साधना का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण भी कर्म छोड़ देने और त्याग के बीच फर्क बताते हैं।

ऋषि मुनियों का नाम लेते ही आंखों के सामने एक ऐसी छवि बनती है, जिसमें कोई साधु जंगल में बैठा है। शरीर पर साधारण वस्त्र हैं। सामने धूनी जल रही है। मन ध्यान में है। हालांकि हिंदू सनातनी दर्शन में ऋषि होना सिर्फ घर छोड़ देना नहीं है। यह भीतर की कई गांठें खोलने की साधना है। हमारे वेद पुराण बताते हैं कि ऋषि वह नहीं जो सबसे दूर हो गया। सही मायने में ऋषि-मुनि वो संत होते हैं जिन्होंने अपने भीतर के लोभ, मोह, अहंकार और इच्छाओं पर विजय पा ली हो।

Akshat Gupta

हर ऋषि को करना पड़ता है ये 5 त्याग

हिंदू धर्म में त्याग को साधना का सबसे महत्वपूर्ण अंग माना गया। भगवद्गीता में श्रीकृष्ण भी कर्म छोड़ देने और त्याग के बीच फर्क बताते हैं। गीता के अनुसार सिर्फ कर्मों का त्याग संन्यास नहीं है। कर्मों के फल की आसक्ति छोड़ना भी त्याग का महत्वपूर्ण रूप है। तो आखिर वह कौन-से त्याग हैं, जो साधक को ऋषि-मुनि की राह पर ले जाते हैं?

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