Aaj Nag Panchami Hai Kya: क्या आपको भी लग रहा है कि नाग पंचमी तो अगस्त में हो चुकी थी, फिर सितंबर में इसका नाम क्यों सुनाई दे रहा है? दरअसल, यहां मामला त्योहार से ज्यादा पंचांग की गणना का है। भारत में अलग-अलग क्षेत्रों में महीनों की गणना करने के लिए अलग-अलग परंपराएं प्रचलित हैं। इसी वजह से एक ही पर्व की तारीख कुछ जगहों पर अलग दिखाई दे सकती है।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - Nag Panchami की पूजा छूट गई थी? तो आज करें पूजा, 2026 की दूसरी नाग पंचमी आज, जानें शुभ मुहूर्त और विधि
नाग पंचमी भी ऐसा ही त्योहार है, जिसकी तारीख को लेकर कई बार लोगों के बीच उलझन हो जाती है। कोई अगस्त की तारीख बताता है, तो कहीं सितंबर में इसकी चर्चा होती है। इसका कारण कोई गलती नहीं, बल्कि पूर्णिमांत और अमांत पंचांग के बीच का अंतर है। आसान भाषा में कहें तो दोनों पंचांगों में महीने के खत्म होने और अगले महीने की शुरुआत की गणना अलग तरीके से की जाती है।
आज नाग पंचमी है क्या
अमांत पंचांग के अनुसार आज 1 सितंबर को भी नाग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। गुजरात, गोवा, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल और आंध्र प्रदेश जैसे कई क्षेत्रों में अमांत पंचांग का इस्तेमाल किया जाता है। इस पंचांग में महीना अमावस्या के आसपास समाप्त माना जाता है। इसलिए यहां सावन का महीना पूर्णिमांत गणना की तुलना में करीब 15 दिन बाद खत्म होता है। इसी गणना के कारण जिस तिथि को पूर्णिमांत पंचांग में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की पंचमी कहा जाता है, वही अमांत पंचांग में श्रावण कृष्ण पक्ष की पंचमी मानी जाती है।
पूर्णिमांत पंचांग में कब मनाई गई नाग पंचमी?
उत्तर भारत के कई हिस्सों में पूर्णिमांत पंचांग की परंपरा मानी जाती है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में इसी गणना के अनुसार सावन महीने के शुक्ल पक्ष की पंचमी को नाग पंचमी मनाई गई। जो 17 अगस्त को मनाई गई थी।
आपके लिए कौन-सी तारीख सही है?
आपके क्षेत्र में कौन-सी तारीख मान्य है, यह वहां प्रचलित पंचांग और स्थानीय परंपरा पर निर्भर करता है। इसलिए पूजा या व्रत रखने से पहले अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार तिथि देखना सबसे सही रहेगा।
नाग पंचमी की पूजा कैसे करते हैं
नाग पंचमी पर पूजा के लिए सबसे पहले घर के पूजा स्थान को साफ करें और नाग देवता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। फिर जल, दूध, फूल, अक्षत, रोली और मिठाई अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर नाग देवता की पूजा करें और परिवार की सुख-शांति की प्रार्थना करें।
