Aaj Ka Panchang 9 April 2025 (आज का पंचांग 9 अप्रैल 2025): बुधवार, हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में एक विशेष स्थान रखता है। ये दिन बुध ग्रह से जुड़ा होता है, जिसे विद्या, बुद्धि, वाणी और व्यापार का कारक माना गया है। पंचांग के अनुसार, प्रत्येक दिन के साथ विशेष ग्रह, देवता, रंग और कर्म जुड़े होते हैं, जो उस दिन के महत्व को दर्शाते हैं। बुधवार को विशेष रूप से भगवान गणेश की पूजा की जाती है, जो विघ्नहर्ता और बुद्धि के देवता माने जाते हैं। ज्योतिष के अनुसार, बुधवार का दिन व्यापार, शिक्षा, वाणी और संचार से जुड़े कार्यों के लिए अत्यंत ही शुभ होता है। यदि बुध ग्रह कुंडली में शुभ स्थान पर हो, तो व्यक्ति बुद्धिमान और व्यापार में कुशल होता है। वहीं, अशुभ बुध मानसिक तनाव, वाणी दोष और भ्रम उत्पन्न कर सकता है। अतः इस दिन बुध ग्रह को प्रसन्न करने हेतु व्रत रखना, हरे वस्त्र धारण करना और तुलसी को जल अर्पित करना लाभकारी माना जाता है। धार्मिक रूप से भी बुधवार का दिन पूजा-पाठ, गणेश आराधना और ब्राह्मणों को दान देने के लिए आदर्श होता है। यहां पढ़ें 9 अप्रैल 2025 का पंचांग।
Aaj Ka Panchang 9 April 2025
आज का पंचांग 9 अप्रैल 2025 (Aaj Ka Panchang 9 April 2025)
- संवत - पिङ्गला विक्रम संवत 2082
- माह - चैत्र
- तिथि - चैत्र माह, शुक्ल पक्ष, द्वादशी
- पर्व - महा व्रत एकादशी पारण
- दिवस - बुधवार
- सूर्योदय - 06:09 ए.एम सूर्यास्त - 6:39 पी.एम
- नक्षत - मघा
- चंद्र राशि - सिंह, स्वामी राशि-सूर्य
- सूर्य राशि - मीन, स्वामी ग्रह-गुरु
- करण - विष्टि
- योग - गण्ड
आज के शुभ मुहूर्त
- अभिजीत - नहीं है।
- विजय मुहूर्त - 02:23 पी.एम से 03:26 पी.एम तक
- गोधुली मुहूर्त - 06:22 पी.एम से 07:22 पी.एम तक
- ब्रह्म मुहूर्त - 4:03 ए.एम से 05:09 ए.एम तक
- अमृत काल - 06:03 ए.एम से 07:44 ए.एम तक
- निशीथ काल मुहूर्त - रात 11:43 से 12:25 तक रात
- संध्या पूजन - 06:30 पी.एम से 07:05 पी.एम तक
दिशा शूल- उत्तर दिशा। इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशा शूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं, यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त - राहुकाल - दोपहर 12:00 बजे से 01:30 बजे तक
क्या करें- आज परम पवित्र व्रत एकादशी पारण है। द्वादशी तिथि है। भगवान गणेश की उपासना करें, व्रत रहें। द्वादशी तिथि व बुधवार व्रत,उपासना व गणेश व भैरव पूजा का पुण्य दिवस है। बटुक भैरव स्तोत्रम का पाठ करें। भगवान भैरव को समर्पित शुक्ल पक्ष द्वादशी बुधवार का नियमित व्रत रहें। महा मृत्युंजय मंत्र का जप करें। नियम पूर्वक व्रत व दान-पुण्य करना बहुत फलित होता है। किसी भी मंदिर परिसर में नीम, महुआ, बेल, बरगद ,आम, पाकड़ व पीपल का पेड़ लगाएं। अपने घर के मंदिर में अखण्ड दीप जलाइए। शिव पुराण का पाठ बहुत फलदायी है। मन का सात्विक होना बहुत आवश्यक है। मंदिर में कीर्तन कराएं। भगवान गणेश को मिठाई व दूर्वा अर्पित करें। सात अन्न का दान करें। भगवान गणेश उपासना व्यक्ति को विद्वान बनाती है। गणपति बुद्धि के देवता हैं। वो निर्विध्न रूप से किसी भी कार्य को संपूर्ण करवाते हैं।
क्या न करें - किसी को अप्रिय व कटु वाणी मत बोलें।
