आज का पंचांग (1 January 2026): 1 जनवरी 2026 दिन को गुरुवार का दिन है। इस दिन सूर्य के वर्ष 2026 की शुरुआत होगी। इस दिन पौष मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी रात 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगी, फिर चतुर्दशी लग जाएगी। प्रदोष काल के समय त्रयोदशी तिथि रहने के कारण साल 2026 का पहला प्रदोष व्रत भी 1 जनवरी के दिन ही रखा जा रहा है। आप शुभ समय पर प्रदोष व्रत का पूजन कर सकते हैं। नक्षत्र रोहिणी रात 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा, फिर मृगशिरा नक्षत्र शुरू हो जाएगा। चंद्रमा पूरे दिन वृषभ राशि में रहेगा। योग शुभ शाम 5 बजकर 12 मिनट तक रहेगा। करण तैतिल रात 10 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। आज रवि योग रात 10 बजकर 48 मिनट से 2 जनवरी सुबह 7 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। यह शुभ योग है।
1 जनवरी 2026 का पंचांग
सूर्योदय और चंद्रोदय का समय
सूर्य सुबह 7 बजकर 14 मिनट पर उदय होगा और शाम 5 बजकर 35 मिनट पर अस्त होगा। चंद्रमा दोपहर 3 बजकर 14 मिनट पर उदय होगा और 2 जनवरी सुबह 6 बजकर 7 मिनट पर अस्त होगा। दिन की लंबाई 10 घंटे 21 मिनट 29 सेकंड और रात की 13 घंटे 38 मिनट 44 सेकंड रहेगी।
तिथि, नक्षत्र, योग और करण
पौष माह के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी रात 10:22 तक, फिर शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी लग जाएगी। नक्षत्र रोहिणी रात 10:48 तक, फिर मृगशिरा। करण गर 2 जनवरी सुबह 5:00 तक।
चंद्र मास और संवत
विक्रम संवत 2082 कालयुक्त, शक संवत 1947 विश्वावसु, गुजराती संवत 2082 पिंगल। चंद्र मास पौष (पूर्णिमांत और अमान्त)। प्रविष्टे/गते 17।
ऋतु और अयन
द्रिक ऋतु शिशिर, वैदिक ऋतु हेमंत, द्रिक अयन उत्तरायण, वैदिक अयन दक्षिणायन।
1 जनवरी 2026 का शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:25 से 6:19 बजे तक
- प्रातः संध्या: सुबह 5:52 से 7:14 बजे तक
- अभिजित मुहूर्त: दोपहर 12:04 से 12:45 बजे तक
- विजय मुहूर्त: दोपहर 2:08 से 2:50 बजे तक
- गोधूलि मुहूर्त: शाम 5:33 से 6:00 बजे तक
- सायाह्न संध्या: शाम 5:35 से 6:57 बजे तक
- अमृत काल: शाम 7:57 से 9:23 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: रात 11:58 बजे से 2 जनवरी सुबह 12:52 तक
- रवि योग: रात 10:48 से 2 जनवरी सुबह 7:14 बजे तक
1 जनवरी 2026 का अशुभ मुहूर्त
- राहुकाल: दोपहर 1:42 से 3:00 बजे तक
- यमगण्ड: सुबह 7:14 से 8:32 बजे तक
- गुलिक काल: सुबह 9:49 से 11:07 बजे तक
- विडाल योग: रात 10:48 से 2 जनवरी सुबह 7:14 बजे तक
- दुर्मुहूर्त: सुबह 10:41 से 11:23 बजे तक
- वर्ज्य: दोपहर 2:50 से 3:31 बजे तक और दोपहर 3:42 से 5:07 बजे तक
- बाण: रोग – रात 8:59 से पूरी रात तक
आनंदादि और तमिल योग
आनंदादि योग में उत्पात रात 10:48 तक, फिर मृत्यु। तमिल योग में मरण रात 10:48 तक, फिर मरण। जीवनम में पूर्ण जीवन, नेत्रम में दो नेत्र।
निवास और शूल
होमाहुति शनि को (रात 10:48 तक), फिर चंद्र को। दिशा शूल दक्षिण दिशा में – दक्षिण की यात्रा टालें। अग्निवास पृथ्वी में। चंद्र वास दक्षिण में। शिववास रात 10:22 तक नंदी पर, फिर भोजन में। राहु वास दक्षिण, कुंभ चक्र पश्चिम में।
आज रोहिणी नक्षत्र और चंद्रमा वृषभ में होने से स्थिरता, सुख और आर्थिक लाभ मिलेगा। गुरुवार होने से गुरु जी को पीले वस्त्र-चने की दाल चढ़ाएं, विष्णु सहस्रनाम पढ़ें और पीले फल दान करें, सारे कार्य सिद्ध होंगे।
