Kalki Jayanti 2026 Date & Shubh Muhurat: भगवान विष्णु को जगत का पालनहार माना जाता है, जिन्होंने समय-समय पर समाज के कल्याण और हित के लिए अवतार लिए हैं। पौराणिक कथाओं में विष्णु जी के कुल 24 अवतारों का वर्णन है, जिनमें से 23 अवतार हो चुके हैं। वर्तमान में कलयुग चल रहा है, जिसके अंत में भगवान विष्णु का अंतिम अवतार कल्कि होना है। भविष्य में होने वाले इसी अवतरण की स्मृति और प्रतीक्षा में हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को कल्कि जयंती मनाई जाती है। मान्यता है कि कलियुग के अंत में जब धरती पर पाप और अधर्म अपने चरम पर होगा, तब भगवान विष्णु कल्कि का रूप लेंगे और बुराई का नाश कर पुनः पृथ्वी पर धर्म की स्थापना करेंगे।
कल्कि जयंती 2026 में किस दिन मनाई जाएगी?
इस बार सावन शुक्ल षष्ठी तिथि को लेकर कन्फ्यूजन बना हुआ है। जहां कुछ लोग 17 अगस्त 2026 को कल्कि जयंती मना रहे हैं। वहीं, कई लोग 18 अगस्त को भी कल्कि जयंती की पूजा करने की बात कह रहे हैं। हालांकि, द्रिक पंचांग के जरिए कल्कि जयंती की सही तिथि के बारे में जाना जा सकता है। यहां पर आप कल्कि जयंती 2026 की सही तिथि के साथ-साथ दिनभर के शुभ मुहूर्त के बारे में बताया गया है।
कल्कि जयंती 2026 में कब है?
द्रिक पंचांग की गणना के अनुसार, इस बार सावन माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि का आरंभ 17 अगस्त 2026 की शाम 05 बजे से हो रहा है, जो कि अगले दिन 18 अगस्त 2026 की शाम 5 बजकर 50 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में कल्कि जयंती का पर्व 18 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाना शुभ रहेगा।
कल्कि जयंती की पूजा का शुभ मुहूर्त
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कल्कि जयंती के दिन कल्कि जी को छोड़कर किसी भी भगवान की ब्रह्म मुहूर्त, अभिजित मुहूर्त, विजय मुहूर्त, गोधूलि मुहूर्त, सायाह्न सन्ध्या और निशिता मुहूर्त में पूजा की जा सकती है, लेकिन उनकी (भगवान कल्कि) उपासना एक विशेष समय में ही की जाती है। इस बार 18 अगस्त 2026 को दोपहर 4 बजकर 21 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 50 मिनट तक कल्कि जयंती का सबसे उत्तम मुहूर्त है।
कल्कि जयंती के दिन के अन्य शुभ मुहूर्त
| शुभ मुहूर्त | समय |
| सूर्योदय | सुबह 05:52 मिनट पर |
| ब्रह्म मुहूर्त | सुबह 04:25 बजे से 05:08 बजे तक |
| प्रातः सन्ध्या | सुबह 04:46 बजे से 05:52 बजे तक |
| अभिजित मुहूर्त | सुबह 11:59 बजे से दोपहर 12:51 बजे तक |
| विजय मुहूर्त | दोपहर 02:36 बजे से 03:28 बजे तक |
| गोधूलि मुहूर्त | शाम 06:58 बजे से 07:20 बजे तक |
| सायाह्न सन्ध्या | शाम 06:58 बजे से 08:03 बजे तक |
| अमृत काल | रात 09:19 बजे से 11:02 बजे तक |
| निशिता मुहूर्त | मध्य रात्रि 12:03 बजे से 12:47 बजे तक (19 अगस्त) |
भगवान कल्कि का जन्म कब और कहां होगा?
भगवान कल्कि के जन्म से जुड़ी कथाओं का वर्णन कल्किपुराण, श्रीमद् भागवत महापुराण, वायुपुराण, भविष्यपुराण और अग्निपुराण आदि कई हिंदू धर्मग्रन्थों में मिलता है। इसके अलावा बौद्ध धर्म और सिख धर्म के ग्रन्थों में भी भगवान कल्कि के अवतरण से जुड़ी विभिन्न कथाएं वर्णित हैं। कहा जाता है कलियुग के अन्त में शम्भल नामक गांव में विष्णुयश नाम के एक ब्राह्मण के घर में भगवान कल्कि का जन्म होगा। बता दें कि इसी जगह पर श्री कल्कि धाम मन्दिर भी है, जहां पर नियमित रूप से भगवान कल्कि की पूजा की जाती है।
कल्कि जयंती के दिन क्या किया जाता है?
कल्कि जयन्ती के पावन दिन भगवान विष्णु के मन्दिरों में श्रीहरि और कल्कि भगवान की विशेष रूप से पूजा-अर्चना की जाती है। साथ ही कुछ लोग श्री विष्णु सहस्रनाम का पाठ और व्रत रखते हैं। कल्कि जयंती का व्रत अगले दिन ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देने के बाद खोला जाता है।
