2 October 2024 Panchang (2 अक्टूबर 2024 पंचांग): आश्विन मास की अमावस्या के दिन सर्व पितृ अमावस्या होगी। आज ही दिन साल का आखिरी सूर्य ग्रहण भी लग रहा है। ये सूर्य ग्रहण 2 अक्टूबर की रात 09 बजकर 13 मिनट पर होगा और इसका अंत देर रात 03 बजकर 17 मिनट तक रहेगा। आज के दिन अभिजीत मुहूर्त 11:54 से 12 बजकर 37 मिनट तक रहने वाला है। इस समय में श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। आइए जानें आज का पूरा पंचांग।
2 October 2024 Panchang (2 अक्टूबर 2024 पंचांग)
संवत-पिङ्गला विक्रम संवत 2081माह-आश्विन ,कृष्ण पक्ष
तिथि- अमावस्या व्रत- पितृ पक्ष,सर्वपितृ अमावस्या
दिवस-बुधवार
सूर्योदय-06:13am
सूर्यास्त-06:09pm
नक्षत्र- उत्तराफाल्गुनी
चन्द्र राशि - कन्या राशि,स्वामी ग्रह-बुध
सूर्य राशि- कन्या राशि,स्वामी ग्रह -बुध
करण= शकुनि
योग: -शुक्ल
शुभ मुहूर्त
1अभिजीत-11:54 am से 12:37 pm तक
2विजय मुहूर्त-02:23pm से 03:23 pm तक
3गोधुली मुहूर्त -06:20pm से 07:25 pm तक
4 ब्रम्ह मुहूर्त-4:06m से 05:05am तक
5अमृत काल-06:08am से 07;42am तक
6निशीथ काल मुहूर्त-रात्रि 11:45 से 12:21तक रात
संध्या पूजन-06:26 pm से 07:05pm तक
दिशा शूल -उत्तर दिशा ।इस दिशा में यात्रा से बचें। दिशाशूल के दिन उस दिशा की यात्रा करने से बचते हैं,यदि आवश्यक है तो एक दिन पहले प्रस्थान निकालकर फिर उसको लेकर यात्रा करें।
अशुभ मुहूर्त
राहुकाल-सोमवार 09 बजे से 10:30 बजे तकक्या करें-आज सर्वपितृ तिथि है। पितृ पक्ष चल रहा है। आज चतुर्दशी श्राद्ध दिवस है।अपने पितरों का श्राद्ध अवश्य करें। आज मंगलवार का पावन व्रत रख सकते हैं। हनुमान जी की उपासना करें। हनुमान जी संकटहर्ता हैं। उनकी भक्ति संकटों से मुक्तिदायनी हैं।वह संकटों का नाश करते हैं। हनुमान जी की उपासना से सभी देवता प्रसन्न रहते हैं।आज संकीर्तन करें।गंगा जल से शिव लिंग का रुद्राभिषेक करने से पापों से मुक्ति मिलती है। सायंकाल बजरंगबली जी के मंदिर पहुचकर उनको पीपल के पत्ते की माला अर्पित करें। सात्विक रहें।सत्य बोलें। इसका बहुत महत्व है। सुंदरकांड का पाठ करें।हनुमान चालीसा का 07 पाठ करें। पितृ पक्ष में नियमित पितरों का श्राद्ध करें । गाय को रोटी,गुड़ व भोजन दें। कौवे को नित्य भोजन दें। श्राद्ध पक्ष में नियमित तर्पण करें व तिथि के दिन श्राद्ध अवश्य करें।पिता ,माता ,गुरु व बड़े भाई का चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लें।आज रोग से पीड़ित लोग हनुमान बाहूक का पाठ करें।
क्या न करें-पितरों का श्राद्ध करना मत भूलें।
