आइजॉल की शांत सड़कों और स्वच्छ वातावरण से यहां आने वाले पर्यटक काफी प्रभावित होते हैं। एक बार यहां आने वाला शख्स यहां बार-बार आना चाहता है।
यह शहर दिखाता है कि सार्वजनिक अनुशासन और सामुदायिक मूल्य मिलकर समाज में समरसता बनाए रख सकते हैं। मिजो समाज की ईमानदारी, जिम्मेदारी और सामूहिक भावना आइजॉल की व्यवस्था की नींव है।
दिल्ली-मुंबई जैसे भारत के कई शहरों में हॉर्न बजाना सामान्य बात है और लोग बिना वजह भी हॉर्न बजाते रहते हैं। वहीं आइजॉल में सन्नाटा और शालीनता जीवन का हिस्सा है।
आइजॉल का अनुशासन यहां के सख्त कानूनों या जुर्मानों की वजह से नहीं, बल्कि नागरिकों के आत्मनियंत्रण और नैतिकता से आता है। यहां के लोग नियमों का बखूबी पालन करते हैं।
आइजॉल में लोग न स्वयं नियमों का पालन करते हैं, बल्कि दूसरों को भी पालन के लिए प्रेरित करते हैं। फिर चाहे वह ट्रैफिक हो या सफाई के मामले में।
आइजॉल यह साबित करता है कि समुदाय आधारित सहयोग से किसी भी शहर में शांति और स्वच्छता लाई जा सकती है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटक यहां की सड़कों की व्यवस्था और सफाई देखकर आश्चर्यचकित रह जाते हैं।
पहाड़ियों पर बसा आइजॉल शहर न सिर्फ सुंदर है, बल्कि शांति और अनुशासन का प्रतीक भी है। आइजॉल यह संदेश देता है कि अगर नागरिक सचेत और जिम्मेदार हों, तो कोई भी शहर शांत, स्वच्छ और आदर्श बन सकता है।